चूत से तेल निकाल दिया

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Antarvasna, hindi sex kahani:

Chut se tel nikaal diya मेरा नाम शैफाली है मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ मेरी शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई है मेरी शादी लखनऊ में ही हुई है। मेरे पिताजी का बहुत बड़ा बिजनेस है उन्होंने हमारी सारी जरूरतों को पूरा किया है लेकिन जब से मेरी शादी हुई है तब से मुझे एडजेस्ट करने में थोड़ा तकलीफ हो रही है। मेरे पति एक कम्पनी में काम करते है उनकी तनख्वा इतनी नही है कि वह मेरी हर एक जरूरत को पूरा कर सके उनके ऊपर घर की भी जिम्मेदारी है जिसे वह बखूबी निभा रहे है। मैंने और रमन ने लव मैरिज की थी मेरे घर वाले मेरी शादी रमन से नही करवाना चाहते थे क्योकि वह एक सामान्य से परिवार के थे। शादी से पहले मैंने जब अपने पिताजी से रमन की बात कही तो उन्हीने उस वक्त कहा कि मैं पहले रमन से मिलना चाहता हूँ। मैंने अगले दिन रमन को अपने घर वालो से मिलवाया तो उन्हें रमन पसन्द नही आये। पिताजी कहने लगे कि तुम रमन के साथ कभी खुश नही रह सकती और ना ही वह तुम्हारी किसी जरूरत को पूरा कर सकता है।

उस दिन पिताजी ने रमन के तौर तरीके और रमन का पहनावा देख कर यह सब कहा था। पिताजी कहने लगे कि रमन की पारिवारिक स्थिति कुछ ठीक नही है वह तुम्हारे लायक बिल्कुल भी नही है पिताजी की यह बात सुनकर मुझे बहुत बुरा भी लगा था परन्तु मैं रमन से प्यार भी बहुत करती थी। मैं और रमन कॉलेज के दौरान मिले थे रमन से पहले मेरी दोस्ती हुई और उसके बाद हम दोनों में प्यार होता चला गया। रमन ने यह बात मुझे पहले ही कह दी थी कि तुम्हारे पिताजी हमारे इस रिश्ते को कभी स्वीकार नही करेंगे। उस वक्त लगता तो मुझे भी था कि पिताजी मेरी शादी रमन से बिल्कुल भी नही होने देंगे लेकिन जैसे तैसे मैंने उन्हें मना ही लिया था। रमन से शादी हो जाने के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरीके से बदल गयी मैं पहले जैसी बिल्कुल भी नही थी मेरा रहन सहन और मुझमे पूरी तरीके से बदलाव आ चुका था। जब मैं अपने घर अपने मां पिताजी से मिलने जाती तो वह मुझे देख कर बहुत दुखी होते थे वह कहते कि बेटा तुमने ये अपना क्या हाल बना रखा है।

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मैं उनसे कहती कि मैं रमन के साथ बहुत खुश हूं परन्तु कहीं ना कहीं मुझे यह भी दुख होता कि शादी के बाद मेरी जिंदगी में काफी बदलाव आ चुके है लेकिन फिर भी मैं हमेशा खुश रहती। मुझे रमन से कोई शिकायत नही थी क्योंकि रमन ने मुझे अपनी स्थिति के बारे में पहले ही बता दिया था और रमन से शादी करने का फैसला भी मेरा ही था इसलिए मैं किसी को कुछ नही कह सकती थी। मुझे लगता था कि मुझे भी कहीं जॉब करनी चाहिए इसलिए एक दिन मैंने रमन से इस बारे में बात की। रमन को पहले तो थोड़ा अजीब लगा वह मना करने लगे लेकिन बाद में वह मेरी बात मान गए और फिर मैं अपनी जॉब की तलाश करने लगी। मैंने कई जगह इंटरव्यू दिए लेकिन मुझे मेरे तरीके की जॉब नही मिल पा रही थी मैं एक अच्छी जॉब की तलाश में थी। इतनी मेहनत करने के बाद आखिर मुझे एक जगह मेरे मन मुताबिक जॉब मिल ही गयी वहां पर मेरी सैलरी भी काफी अच्छी थी। अब मैं जॉब करने लगी तो मुझे बहुत खुशी हो रही थी मैं अपनी जॉब से बहुत खुश थी। रमन को भी अब थोड़ा सहारा मिल चुका था नही तो रमन ही सारे घर की जिम्मेदार को उठा रहे थे रमन पर भी ज्यादा बोझ नही था। धीरे धीरे हमारे घर की स्थिति भी अब ठीक होने लगी थी मैं और रमन अपनी तनख्वा में से थोड़े बहुत पैसे जमा करने लगे थे। इस बात से मेरे पिताजी और मां बहुत खुश थे पहले वह मेरे जॉब करने से बहुत नाराज थे लेकिन अब वह भी खुश है क्योकि अब सब कुछ बड़े अच्छे से चल रहा है। मैं अपनी जॉब से बड़ी खुश थी और अपनी जिंदगी मे अच्छे से रमन के साथ बिता रही थी। हम दोनों के जीवन में अब पहले की तरह ही सब खुशियां लौट आई थी, रमन और मैं एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते। कुछ दिनों के लिए रमन अपने काम से बाहर जा रहे थे मैं घर पर अकेली थी। उस दिन जब मैं अपने ऑफिस से लौटी तो मुझे कभी अकेलापन महसूस हो रहा था। मैंने अपनी मां से काफी देर तक बात की जब मैंने फोन रखा तो उसी वक्त मुझे रमन का फोन आया। मैंने रमन को बताया मैं ऑफिस से घर लौट आई थी अभी मैं रूम में बैठी हुई हूं रमन मुझे कहने लगे कि मैं तुम्हें बड़ा मिस कर रहा हूं।

मैंने रमन को कहा मैं भी तो तुम्हें बहुत मिस कर रही हूं काफी समय बाद रमन मुझसे अलग थे तो मुझे यह उस वक्त एहसास हुआ। जब रमन वापस लौटे तो मैंने रमन को गले लगा लिया रमन ने भी मुझे गले लगा कर कहा कितने समय बाद आज हम दोनों एक दूसरे के गले मिल रहे हैं। हम दोनो एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे और अपनी जिंदगी अच्छे से बिता रहे थे हमें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी। रमन ने मुझे किस किया और मुझे बहुत अच्छा लगा मेरे अंदर एक अलग ही करंट दौड़ने लगा था काफी समय बाद रमन और मैं एक दूसरे के साथ बड़े खुश थे। मैंने रमन के लंड को पकड़ लिया जब मैंने रमन के लंड को पकड़ा तो मुझे अच्छा लगने लगा रमन ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया था। रमन ने मुझे बिस्तर पर लेटाया मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। जिस प्रकार से रमन ने मेरे अंदर की आग को बढ़ा दिया था उससे मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी वह मेरे होठों को चूमने लगी जब रमन मेरे होठों को चूमने लगे तो मुझे अच्छा लगने लगा था और रमन को भी बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था। रमन और मैं एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे अब रमन ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए।

रमन ने मेरे बदन से कपड़े उतारकर मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा। रमन को भी बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था रमन को ऐसा लग रहा था जैसे कि हम लोग पहली बार एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे हैं। इतने समय बाद हम लोग खुलकर एक दूसरे के साथ संबंध बनाने वाले थे वह मेरे स्तनों को चूसने लगे मैंने रमन से कहा मुझे तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना है तो रमन ने अपने लंड को मेरे मुंह के अंदर डाल दिया। मैंने रमन के लंड को चूसना शुरू किया मै अच्छे से रमन के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था जब मैं ऐसा कर रही थी तो रमन बड़े ही खुश नजर आ रहे थे। मै रमन का साथ बडे अच्छे से दे रही थी रमन और मैं एक दूसरे के लिए पूरी तरीके से तड़पने लगे थे और मेरी तड़प बढने लगी थी। मैंने अपने पैरों को खोला जब मैंने अपने पैरों को खोला तो रमन ने मेरी चूत पर अपने लंड को सटाया और वह अपने लंड को मेरी चूत पर रगडने लगे तो मेरी योनि से पानी बाहर निकल रहा वह मेरे अंदर आग पैदा कर रहा था अब मै बहुत ज्यादा खुश हो चुकी थी। रमन ने मेरी चूत पर अपने लंड लगाकर रगडा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था रमन को भी बड़ा अच्छा लग रहा था। मेरी चूत से निकलता हुआ पानी अब कुछ ज्यादा ही अधिक हो चुका था रमन ने एक जोरदार झटके के साथ मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जब रमन का लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्लाई मेरी चूत मे बहुत दर्द होने लगा था। रमन ने कहा बस थोड़ी देर की बात है उसके बाद तुम्हें अच्छा लगने लगेगा। रमन को बड़ा अच्छा लगने लगा था और मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था रमन ने मेरे दोनों पैरो को अपने कंधों पर रख लिया अब वह मेरी चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार करने लगे। रमन मेरी चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार कर रहे थे मेरे अंदर की आग अब बढ़ती ही जा रही थी मेरे अंदर कि आग इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

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मेरे अंदर की आग अब लगातार बढ़ती जा रही थी जब रमन ने अपने लंड को बाहर निकालना तो रमन ने मुझे कहा तुम मेरे लंड को चूस लो। मैंने रमन के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा। मैने रमन के लंड को तब तक चूसा जब तब तक रमन के लंड ने पानी बाहर नहीं छोड़ दिया और मुझे बहुत अच्छा लगा। जब मैंने रमन के लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मैंने रमन के सामने अपनी चूतड़ों को किया। रमन ने मेरी चूत के अंदर उंगली डाल दी और मेरी चूत मे उंगली डालकर रमन ने मुझे दोबारा से गर्म कर दिया और मेरी चूत के अंदर जब रमन ने अपने लंड को घुसाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा।

रमन ने अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था। रमन ने अपने लंड को मेरी चूतड़ों पर टकराना शुरू कर दिया था मैं जब रमन के लंड से चूतडो को टकरा रही थी तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और रमन को भी बड़ा मजा आ रहा था। रमन ने मुझे कहा मुझे तुम्हें चोदना में इतने दिनों बाद मजा आ रहा है मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि आज हम लोग अपनी सुहागरात मना रहे हो। मैंने रमन को कहा रमन आज मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है और मैं बड़ी खुश हूं। रमन ने मुझे कहा तुम मेरे लंड के ऊपर बैठ जाओ। मै रमन के लंड के ऊपर बैठ गई मैं जब रमन के लंड के ऊपर बैठी तो मैं अब रमन के लंड के ऊपर अपनी चूतड़ों को करने लगी रमन तडपने लगे मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था। मैं जब रमन के लंड के ऊपर नीचे हो रही थी तो मेरे अंदर की आग बढ़ रही थी और मेरी चूत से निकलता हुआ पानी भी बहुत ज्यादा अधिक होने लगा था। मेरी चूत से निकलता हुआ पानी इतना ज्यादा बढ़ने लगा था कि रमन ने जब मेरी चूत के अंदर अपने माल को गिराया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा और मेरे अंदर के आग बुझ चुकी थी।


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