चोदकर दूसरी पत्नी बना लिया

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Antarvasna, hindi sex kahani:

Chodkar dusri patni bana liya रविवार का दिन था और सुबह के 10:00 बज रहे थे मैं घर पर ही था हम लोग नाश्ता कर के साथ में बैठे हुए थे। मैं और बबीता आपस में बात कर रहे थे बबीता मुझसे बच्चों की फीस को लेकर बात कर रही थी क्योंकि स्कूल के द्वारा कुछ दिनों पहले ही स्कूल की फीस बढ़ा दी गई थी जिससे बबीता काफी ज्यादा गुस्से में भी थी और वह बहुत परेशान भी थी। मैंने उसे कहा कि अब यह सब छोड़ो और तुम यह बताओ कि बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है तो बबीता मुझे कहने लगी कि बच्चों की पढ़ाई तो ठीक चल रही है। मुझे घर में बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था इसलिए मैं बच्चों को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता था। उस दिन हम दोनों आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी दरवाजे की डोर बेल बजी और मैंने बबीता से कहा बबिता जरा देखना दरवाजे पर कौन है। बबीता दरवाजे पर गई और जब वह दरवाजे पर गई तो मैंने देखा कि सामने गगन खड़ा है गगन हमारे पड़ोस में ही रहता है।

मैंने गगन से कहा गगन आज काफी दिनों बाद तुम घर पर आ रहे हो। गगन मुझे कहने लगा कि रोशन तुम तो जानते ही हो कि समय की कितनी कमी है आज समय था तो सोचा कि तुमसे मिल ही लेता हूं इतने दिनों से सोच रहा था कि तुम्हें मिलूंगा। गगन कहने लगा कि मेरे ऑफिस में मेरा प्रमोशन हो चुका है गगन ने बबीता को मिठाई का डब्बा दिया और कहा कि भाभी बच्चों का भी आप मुंह मीठा करवा दीजिए। मैंने गगन को गले लगाते हुए बधाई दी और कहा यह तो बड़ी खुशी की बात है गगन मुझसे कहने लगा कि आज अंकल आंटी कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं मैंने गगन से कहा कि वह लोग गांव गए हुए हैं और वहां से वह कुछ दिनों में लौटेंगे। गगन और मैं आपस में बात कर रहे थे तो गगन मुझे कहने लगा कि मैं तो काफी दिनों से सोच रहा था कि तुमसे मिलने के लिए आऊं लेकिन समय का बड़ा भाव है। मैंने गगन को कहा कोई बात नहीं तुम यह बताओ कि घर में सब लोग कैसे हैं गगन कहने लगा कि घर में भी सब लोग ठीक हैं।

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गगन मुझे कहने लगा कि तुमने और भाभी ने तो जैसे घर आना ही छोड़ दिया है। मैंने गगन को कहा तुम तो जानते ही हो कि मेरे पास तो बिल्कुल भी समय नहीं होता है और रही बात बबीता की तो बबीता बच्चों को संभालने में ही इतनी व्यस्त रहती है कि मुझे तो कई बार लगता है कि घर में किसी नौकरानी को रख लेना चाहिए जो कि बच्चों की देखभाल भी कर सके और घर का काम भी कर सके। गगन कहने लगा कि रोशन तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मैंने तो घर में कामवाली बाई रख ली है मैंने गगन को कहा कि यदि तुम्हें कोई काम वाली बाई मिले तो मुझे भी तुम जरूर बताना गगन कहने लगा ठीक है मैं तुम्हें जरूर बताऊंगा। मैं चाहता था कि मैं बबीता के साथ कुछ समय बिताऊं क्योंकि जब भी मैं ऑफिस से आता तो बबीता अपने कामों में ही रहती और उसके पास बिल्कुल भी समय नहीं होता था। गगन और मैं साथ में बैठे हुए थे तो बबीता हम दोनों के लिए चाय बना कर ले आई हम दोनों चाय पीने लगे और साथ साथ हम लोग बातें कर रहे थे। गगन कहने लगा कि रोशन भाभी ने चाय तो बड़ी अच्छी बनाई है मैंने गगन को कहा कि बबीता चाय काफी अच्छी बनाती है। मैं बाहर कहीं भी चाय नहीं पीता हूं सिर्फ घर पर ही आकर मैं चाय पिता हूं वह भी बबीता के हाथ की। हम दोनों बहुत देर तक बैठे रहे काफी समय बाद गगन और मैं एक दूसरे से मिले थे उसके बाद गगन मुझे कहने लगा कि रोशन अब मैं चलता हूं मैं तुमसे कल मिलूंगा। मैंने गगन को कहा कल तो मेरा मुश्किल हो पाएगा लेकिन तुम किसी काम वाली बाई को जरूर देख लेना गगन कहने लगा कि हां मैं जरूर किसी कामवाली बाई को देख लूंगा तुम उसकी चिंता मत करो। गगन घर से जा चुका था बबीता और मैं साथ में बैठे हुए थे दोपहर के 1:00 बज चुके थे तो बबीता कहने लगी कि मैं खाना बना देती हूं मैंने बबीता से कहा थोड़ी देर तुम मेरे साथ बैठो। बबीता मेरे साथ बैठी हुई थी मैंने बबीता को बताया कि मैं घर में काम करने वाली बाई को रखना चाहता हूं ताकि हम दोनों के पास एक दूसरे के लिए समय हो बबीता कहने लगी कि वह तो ठीक है लेकिन मैं घर का काम संभाल लेती हूं।

मैंने बबीता को कहा लेकिन फिर भी हम दोनों को तो एक दूसरे के लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है मैं अपने ऑफिस में बिजी रहता हूं और तुम घर के कामों में बिजी रहती हो और हम दोनों के पास बिल्कुल भी समय नहीं होता है मैं चाहता हूं कि हम दोनों कम से कम एक दूसरे के लिए कुछ समय तो निकालें। बबीता मुझे कहने लगी कि यह तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो की हम दोनों एक दूसरे के लिए समय निकाल ही नहीं पाते हैं हमें एक दूसरे के लिए समय निकालना चाहिए। मैंने बबीता से कहा कि हां देखते हैं वैसे मैंने गगन से तो कह दिया है की वह घर मे कोई काम करने वाली नौकरानी देख ले। जब तक हम किसी नौकरानी को घर पर नहीं रख लेते तब तक तो तुम्हें ही बच्चों की जिम्मेदारी को संभालना होगा। मैं और बबीता एक दूसरे से बातें कर रहे थे काफी दिनों बाद हम दोनों ने एक दूसरे से इतनी बातें की उसके बाद बबीता खाना बनाने के लिए रसोई में चली गई। दोपहर के लंच कि वह तैयारी करने लगी थी मैंने बबीता को कहा कि तुम जल्दी से दोपहर की लंच की तैयारी करो।

बबीता खाना बनाने लगी थी और करीब एक घंटे बाद बबीता ने दोपहर का लंच तैयार कर दिया था उसके बाद मैंने और बबीता ने साथ में लंच किया। बच्चों ने लंच नहीं किया क्योंकि उन्होंने नाश्ता काफी देरी से किया था इसलिए उन्होंने लंच करने के लिए मना कर दिया था। अगले दिन से मैं अपने ऑफिस जाने लगा ऑफिस से मैं वही शाम को लौटा करता तो बबीता से मैं कम ही बातें किया करता क्योंकि बबीता भी घर के कामों में रहती और मैं भी ऑफिस से थक कर आता था। एक दिन मैं अपने ऑफिस में बैठ कर काम कर रहा था तभी मैंने देखा कि गगन का मुझे फोन आ रहा है लेकिन मैं गगन का फोन उठा नहीं पाया तो मैंने उसे शाम के वक्त फोन किया उसने मुझे बताया कि उसने काम वाली बाई से बात की है। वह मुझे कहने लगा कि तुम चाहो तो मैं तुम्हारी बात अभी उससे करवा देता हूं मैंने उसे कहा कि तुम मुझे उसका नंबर दे दो मैं उससे बात कर लूंगा। गगन कहने लगा कि हां यह ठीक रहेगा मैं तुम्हें उसका नंबर भेज देता हूं और तुम उससे बात कर लेना। गगन ने मुझे लता का नंबर दे दिया और उसके बाद मैंने उससे बात की लता हमारे घर पर काम करने के लिए तैयार हो चुकी थी और अब वह हमारे घर का काम करने लगी। मुझे और बबीता को एक दूसरे के लिए समय मिलने लगा था लता घर का काम अच्छे से कर रही थी और वह बच्चों की देखभाल भी अच्छे से किया करती तो बबीता भी इस बात से बहुत खुश थी। बबीता और मुझे अब एक दूसरे के लिए समय मिलने लगा था काफी समय बाद हम लोगों ने उस दिन सेक्स का मजा लिया था। रात को मैं बबीता के ऊपर से लेटा हुआ था उसके साथ चुदाई का मजा ले रहा था लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह सब लता भी देख रही है लता का पति एक नंबर का शराबी है वह उसे शायद शारीरिक सुख दे नहीं पाता है इसलिए लता को भी मुझसे कुछ चाहिए था। उस दिन मैंने बबीता को पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था लेकिन अब लता भी चाहती थी कि वह मेरे लंड को अपनी चूत मे ले मैं तो लता को चोदना चाहता था। उस दिन बबीता सब्जी लेने के लिए बाहर गई हुई थी यह बड़ा ही अच्छा था बबीता घर पर नहीं थी। लता को मैंने अपने पास बुलाया और उससे पूछा क्या तुम्हें मेरे साथ सेक्स करना है वह कुछ बोल नहीं रही थी।

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जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने तुरंत ही मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया वह मेरे मोटे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए तड़प रही थी। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को चूस लो उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक मेरे लंड से पानी बाहर नहीं आ गया वह अब मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए तड़पने लगी थी। मैंने भी उसकी सलवार को नीचे करते हुए उसकी चूत को सहलाया जब उसकी चूत पूरी गिली हो गई तो मैंने उसके पैरों को चौड़ा कर दिया। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी अब तो मुझे मजा ही आ गया। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और उसकी चूत का मजा में बड़े अच्छे से लेने लगा उसकी चूत मारकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं बस उसे चोदता ही चला जाऊं और उसकी इच्छा को पूरा करता जाऊं।

वह भी गर्म सांस लेने लगी थी उसकी सांसे बहुत गर्म होने लगी थी उसकी चूत टाइट महसूस होने लगी। उसकी चूत मेरे वीर्य को चूत में लेने के लिए तैयार थी। लह कहने लगी सहाब मेरी चूत मे अपने माल को गिरा दो। मैंने उसकी चूत में ही अपने माल को गिरा दिया उसके बाद मैंने उसकी चूतड़ों को अपनी तरफ करते हुए बड़ी तेज गति से उसकी चूतडो पर प्रहार करना शुरू किया। जब मैं ऐसा कर रहा था तो उसे मज़ा आने लगा वह मुझे कहने लगी साहब आज मजा आ गया मैंने उसे कहा मजा तो आज मुझे भी आ रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे कि मेरी इच्छा पूरी हो चुकी हो। हम दोनों ही पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुके थे मेरे और लता के अंदर की गर्मी पूरी तरीके से शांत हो चुकी थी। मैने दोबारा उसको चोदा मैंने लता के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर दोबारा से उसे चोदना शुरू किया करीब 5 मिनट तक मैंने उसकी चूत के मजा लिया और 5 मिनट बाद वह संतुष्ट हो गई। उसके बाद वह रसोई में चली गई वह मेरी दूसरी पत्नी बन गई है।


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