लंड चूत देख हिलोरे मारने लगा

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Lund chut dekh hilorein maarne laga मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया था और जब मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दिया तो उसके बाद मैं दूसरी जॉब की तलाश में था और जल्द ही मुझे दूसरी नौकरी मिल चुकी थी। जब मुझे दूसरे ऑफिस में जॉब मिली तो उस दिन मेरा पहला ही दिन था पहले दिन जब मैं ऑफिस में गया तो मेरे लिए बड़ा सामान्य सा दिन था उस दिन मेरी ज्यादा किसी से बात नहीं हुई और फिर शाम के वक्त मैं घर लौट आया। जब मैं घर लौटा तो मेरी मां मुझे कहने लगी कि बेटा आज हम लोगों को हमारे रिलेटिव की शादी में जाना है। मैंने उन्हें कहा कि ठीक है तो फिर हम लोग चलते हैं मैं बस जल्दी से तैयार हो जाता हूं। वैसे तो मेरा जाने का मन नहीं था लेकिन मुझे ही मम्मी पापा को कार में लेकर जाना पड़ता है इसलिए मैं उन्हें अपने साथ लेकर चला गया। जब मैं शादी में गया तो शादी में मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था और मैं अकेला ही एक टेबल पर बैठा हुआ था तभी मेरे सामने एक लड़की आ कर बैठी और वह मुझसे बातें करने लगी। मैं उसे जानता नहीं था मैंने पहली बार ही उसे देखा था, मैंने भी उससे अपना हाथ मिलाते हुए कहा कि मेरा नाम राजेश है उसने मुझे कहा मेरा नाम सुप्रिया है।

मैंने सुप्रिया को कहा कि तुम क्या करती हो तो वह मुझे कहने लगी कि मैं अभी कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं। वह बड़ी ही चुलबुली और बिंदास किस्म की लड़की थी उसने मुझसे पूछा कि तुम यहां अकेले क्यों बैठे हो लगता है तुम्हें कोई परेशानी है। मैंने उससे कहा नहीं मुझे तो कोई भी परेशानी नहीं है बस मेरा यहां बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा वह मुझे कहने लगी लेकिन तुम्हारा यहां क्यों मन नहीं लग रहा है। मैंने उससे कहा बस ऐसे ही मैं यहां अकेला था तो अकेला बोर हो रहा था वह मुझे कहने लगी कि मैं भी अपने पापा मम्मी की वजह से ही यहां आई हूं वैसे मेरा भी यहां आने का बिल्कुल मन नहीं था और देखो तुम से यहां मुलाकात हो गई। हम दोनों दोस्त बन गए और हम दोनो बैठ कर दूसरे से बात कर रहे थे मैं इस बात पर हंसने लगा और मैंने सुप्रिया को कहा तुम तो बड़ी अच्छी हो। उसके बाद हम दोनों बैठे रहे मैंने सुप्रिया का नंबर ले लिया था मुझे नहीं मालूम था कि सुप्रिया को मैं इतना पसंद करने लगूंगा कि उसके बाद भी हम लोगों की बात होती रहेगी।

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एक दिन मैं सुप्रिया को मॉल में मिला वह शॉपिंग करने के लिए आई हुई थी तो उसके साथ उसकी सहेलियां भी थी मैं भी उस दिन अकेला ही था तो सुप्रिया ने मुझे कहा कि चलो हम लोग फ़ूड कोट में बैठते हैं। हम लोग फूड कोर्ट में बैठे हुए थे वहां हम लोग काफी देर तक बैठे रहे मुझे सुप्रिया के साथ बात करना अच्छा लग रहा था लेकिन उसकी सहेलियां बोर हो रही थी परन्तु फिर भी हम दोनों काफी देर तक साथ में बैठे रहे उसके बाद मैंने सुप्रिया को कहा कि अब हमें चलना चाहिए। हम लोग उस दिन वापस अपने घर चले आए मैंने सुप्रिया और उसकी सहेलियों को उसके घर तक छोड़ा और फिर मैं अपने घर वापस लौट आया था। मैं अपने घर वापस लौटा तो उसके बाद सुप्रिया से मेरी रात में भी काफी देर तक बात हुई सुप्रिया से जब भी मैं बात करता तो मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरी सारी परेशानियां दूर हो चुकी है उससे बात करके मुझे बहुत ही अच्छा लगता। हम दोनों की बातें काफी होने लगी थी और हम दोनों को बाते करना अच्छा लगने लगा था यह पहली बार था जब सुप्रिया ने मुझसे कहा कि हम लोगों को साथ में कहीं मूवी देखने के लिए जाना चाहिए। सुप्रिया के दिल में भी अब कुछ तो चल रहा था और मैं भी सुप्रिया के साथ समय बिता कर अपने आपको काफी अच्छा महसूस करता इसलिए हम दोनों मूवी देखने के लिए साथ में चले गए। यह पहली बार था जब सुप्रिया मेरे साथ मूवी देखने के लिए आई थी और उसे बड़ा ही अच्छा लग रहा था हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बातें कर रहे थे। सुप्रिया बहुत खुश थी और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था मैंने सुप्रिया का हाथ पकड़ कर उस दिन उसे थिएटर में ही प्रपोज कर दिया। मैं अपने दिल की बात तो कह चुका था फिर उसने भी मुझे गले लगा कर स्वीकार कर लिया अब हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगे।

हम दोनों रिलेशन में थे तो अब हम दोनों एक दूसरे के बिना जैसे रह ही नहीं पाते थे और हम लोग एक दूसरे को अक्सर मिला करते। सुप्रिया का भी कॉलेज अब पूरा हो चुका था और उसका कॉलेज पूरा हो जाने के बाद वह एक दिन मेरे साथ बैठी हुई थी हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो सुप्रिया मुझे कहने लगी कि राजेश मैं सोच रही हूं कि मैं भी जॉब कर लूं मैं घर पर अकेले बोर हो जाया करती हूं। मैंने सुप्रिया को कहा कि हां तुम्हें भी कहीं जॉब कर लेनी चाहिए तो सुप्रिया कहने लगी वैसे मैंने कुछ दिनों पहले अपना रिज्यूम अपने भैया को दिया था। मैंने उसे कहा कि चलो तुम्हारा कहीं ना कहीं जरूर हो ही जाएगा और उसके कुछ समय बाद ही सुप्रिया की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब लग गई और वह वहां जॉब करने लगी। सुप्रिया और मैं अब एक दूसरे को ऑफिस के बाद ही मिला करते थे या फिर जिस दिन हम लोगों की छुट्टी हुआ करती उस दिन हम दोनों एक दूसरे से मुलाकात करते। एक दिन हम कॉफी शॉप में बैठे हुए थे हम लोगों के रिलेशन को करीब 6 महीना हो चुका है लेकिन पता ही नहीं चला कि कब हम लोगों के रिलेशन को 6 महीना बीत चुका है।

हम दोनों को एक दूसरे के साथ बहुत अच्छा लगता है मैंने सुप्रिया को कहा कि मुझे तुम्हारे साथ हमेशा से ही अच्छा लगता है और तुम बहुत ही अच्छी हो जब मैंने तुम्हें पहली बार उस दिन शादी में देखा था तो तुम्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा था। सुप्रिया अब अपनी जॉब में ही बिजी रहने लगी थी इसलिए हम दोनों की पहले से कम मुलाकात हुआ करती थी और फोन पर भी हम लोगों की कम बातें हुआ करती थी। हम दोनों के रिलेशन में सब कुछ ठीक चल रहा था मैं सुप्रिया के साथ खुश था और वह मेरे साथ बहुत खुश थी। हम दोनों एक दूसरे को हमेशा ही खुश रखने की कोशिश किया करते और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। हम दोनों एक दूसरे को बड़ा प्यार करते है और हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने की हमेशा कोशिश करते। मैं सुप्रिया के घर पर था उस दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। उस दिन सुप्रिया के घर पर कोई भी नहीं था संडे का दिन था हम दोनों ने सोचा कि हम दोनों साथ में ही समय बिताए क्योंकि कुछ दिनो से हम लोगों की मुलाकात हो नहीं पाई थी। उस दिन सुप्रिया और मैं जब एक दूसरे के पास बैठे हुए थे तो मैंने सुप्रिया की जांघों पर हाथ फेरना शुरू किया वह मचलने लगी। मैने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया वह नहीं रह पा रही थी। उसने मुझे किस कर लिया हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूमने लगे थे हम दोनों को ही अच्छा लगने लगा था मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी। मैंने सुप्रिया को अपनी गोद में बैठा लिया जब मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया तो मेरा लंड हिलोरे मरने लगा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ रही थी। मैने सुप्रिया के सामने जब अपने लंड को किया तो उसने भी मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे वह बड़े ही अच्छे से चूसने लगी। वह जिस प्रकार से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी उस से मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आता जा रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ पूरी तरीके से मजे लेना चाहते थे। मैने सुप्रिया के कपड़े उतार कर उसके गोरे स्तनों को अपने मुंह में लेना शुरू किया और उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था।

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वह भी बहुत ज्यादा ही उत्तेजित हो चुकी थी वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ पूरी तरीके से मजे मे आ चुके थे हम दोनों के अंदर की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी। हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे मैंने अपने मोटे लंड को सुप्रिया की योनि पर लगाकर अंदर डाल दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मेरी चूत में दर्द हो गया है। मैंने उसे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है सुप्रिया की योनि से खून निकलने लगा था वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही चोदते रहो। सुप्रिया को मज़ा आने लगा था उसकी चूत से निकलता हुआ खून अब बहुत ही ज्यादा अधिक हो चुका था।

मै सुप्रिया को अच्छे से चोदता जा रहा था मेरे अंदर की गर्मी अब बढ चुकी थी हम दोनों ही पूरी तरीके से गरम हो चुके थे मैंने अपने वीर्य की पिचकारी को उसकी चूत में गिराकर अपनी इच्छा को शांत कर लिया। थोड़ी देर हम दोनों साथ में लेटे रहे फिर उसने मेरे लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया। जब उसने ऐसा किया तो मुझे मजा आने लगा काफ़ी देर तक उसने मेरे लंड को चूसा और उसके बाद तो हम दोनों की गर्मी अब इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मैंने उसकी योनि के अंदर दोबारा लंड को डाल कर अपनी इच्छा को पूरा करना चाहा। मैं उसे करीब 10 मिनट तक चोदता रहा 10 मिनट की चुदाई के बाद जब हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढने लगी तो सुप्रिया मेरे गले लग कर लेटी हुई थी और कहने लगी राजेश मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा आज मुझे भी बड़ा मजा आ गया उस दिन के बाद तो जैसे हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़पने लगे और एक दूसरे की चूत का मजा लेने के बारे में सोचते ही रहते।


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