गुलाबी चूत लाल हो गई

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Antarvasna, hindi sex kahani:

Gulabi chut laal ho gayi मैं अपने दोस्त की शादी में जाता हूं। मेरा दोस्त जो चंडीगढ़ में रहता है उसने मुझे अपनी शादी में इनवाइट किया था हालांकि पहले हम दोनों साथ में जॉब किया करते थे लेकिन अब वह चंडीगढ़ में ही रहता है और मैं दिल्ली में रहता हूं मेरा परिवार दिल्ली में ही रहता है। मैं सोहन की शादी के लिए कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ गया हुआ था जब मैं सोहन की शादी में चंडीगढ़ गया तो सोहन के परिवार ने मेरा खूब आदर सत्कार किया उसके बाद मैं वापस दिल्ली लौट आया था। दिल्ली लौटने के बाद एक दिन मैं अपनी कार से घर लौट रहा था जब मैं अपनी कार से घर लौट रहा था सामने से एक मोटरसाइकिल सवार लड़का काफी तेजी से आ रहा था जिससे कि मेरी टक्कर हो गई उस लड़के को ज्यादा चोट तो नहीं आई। मैं इस बात से काफी ज्यादा घबरा गया था मुझे लगा कि कहीं उसे ज्यादा चोट तो नहीं आई इसलिए मैं कार से उतार कर तुरंत उसके पास गया। उसकी गलती थी और जितने भी लोग वहां खड़े थे सब लोगों ने मेरा ही सपोर्ट किया मैंने उस लड़के को वहां से जाने के लिए कहा और वह वहां से चला गया।

मैं भी अब घर लौट आया था मैं जब घर लौटा तो उस दिन पापा मुझे कहने लगे बेटा आज हम लोगों को तुम्हारी मौसी के घर जाना है तुम्हारी मौसी की तबीयत ठीक नहीं है। मैंने पापा से कहा ठीक है पापा हम लोग मौसी के घर हो आते हैं और हम लोग मौसी के घर गए मौसी की तबीयत ठीक नहीं थी। हम लोग देर रात उनके घर से लौट आए जब हम लोग रात के वक्त घर लौटे तो पापा मुझे कहने लगे रजत कल तुम ऑफिस कब जाओगे। मैंने पापा से कहा हां पापा कल मुझे जरूरी काम है। पापा कहने लगे लेकिन बेटा कल तो संडे है, मैंने पापा से कहा हां पापा लेकिन मुझे थोड़ी देर का काम है उसके बाद मैं घर जल्दी लौट आऊंगा। मैंने जब पापा को यह बात कही तो पापा कहने लगे बेटा हम लोग कुछ दिनों के लिए गांव जा रहे हैं तुम हमारी टिकट करवा देना। मैंने पापा से कहा ठीक है पापा मैं आप लोगों की टिकट करवा दूंगा आप लोग निश्चिंत रहिए। मैंने जब पापा को इस बारे में कहा तो पापा कहने लगे बेटा कल तुम हमारी टिकट करवा देना। मैंने पापा से कहा ठीक है पापा मैं कल जरूर आपकी टिकट करवा दूंगा।

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अगले दिन मैंने पापा और मम्मी की टिकट करवा दी वह लोग कुछ दिनों के लिए गांव चले गए। जब वह गांव गए तो मैं घर पर अकेला ही था कुछ दिनों बाद पापा और मम्मी भी लौट आए थे। मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया था मैं अब नौकरी की तलाश में था लेकिन अभी तक कहीं अच्छी जॉब मिल नहीं पाई थी क्योंकि मेरा एक्सपीरियंस भी करीब 7 वर्ष का था इसलिए मैं सोच रहा था कि मुझे कहीं जॉब मिल जाए लेकिन अभी तक मुझे नौकरी नहीं मिली थी और मैं काफी ज्यादा परेशान भी हो गया था। जब मुझे नौकरी मिली तो मैंने वहां ज्वाइन कर लिया जब मैंने नया ऑफिस ज्वाइन किया तो पहली बार मेरी मुलाकात जब सुरभि के साथ हुई तो मुझे लगा सुरभि शायद काफी ज्यादा बोल्ड और बिंदास लड़की है और सुरभि से बात कर के मुझे अच्छा लगा। सुरभि और मेरे बीच काफी अच्छी दोस्ती हो गई हम दोनों के बीच इतनी अच्छी दोस्ती हो गई थी कि हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करने लगे। सुरभि के चेहरे पर जो मुस्कुराहट थी शायद उसके पीछे कोई राज छुपा हुआ था वह मुझे नहीं पता था। जब सुरभि ने मुझे अपने परिवार के बारे में बताया तो  सुरभि ने मुझे बताया उसके पापा का देहांत काफी पहले हो गया था और उसकी मां ने उसकी और उसकी बहन की सारी जिम्मेदारी संभाली। एक समय ऐसा था जब सुरभि की माँ को घर गिरवी रखना पड़ा, सुरभि और सुरभि की बहन की पढ़ाई उसकी मां ने पूरी करवाई सुरभि ने कुछ समय पहले ही अपनी मेहनत के बलबूते नया घर खरीदा। मैंने सुरभि को कहा मैं तो सोचता था तुम्हें शायद कभी कोई परेशानी होगी ही नहीं लेकिन अब सुरभि के साथ मेरे नजदीकियां बढ़ चुकी थी। मैं सुरभि के और भी करीब आने लगा था हम दोनों एक दूसरे से अब ज्यादा से ज्यादा मिलने के बारे में सोचते। हम दोनों ऑफिस के बाद भी एक दूसरे से मिलते और जब भी सुरभि को कुछ परेशानी होती तो वह मुझसे अपनी बातों को शेयर कर लिया करती। मुझे बहुत ही अच्छा लगता था जब सुरभि मुझसे कोई भी बाते शेयर किया करती।

हम दोनों अब एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे मुझे नहीं मालूम था कि सुरभि और मेरे बीच एक दिन इतनी नजदीकीया बढ़ जाएंगे कि मैं अपने दिल के बाद सुरभि को कहने के लिए मजबूर हो जाऊंगा। मैंने अपने दिल की बात सुरभि को कह डाली मैंने जब अपने दिल की बात सुरभि को कही तो मुझे लगा शायद मुझे सुरभि को अपने दिल की बात कहनी चाहिए या नहीं मेरे दिल में ना जाने कितने ही दुविधा थी लेकिन मैंने सुरभि को अपने दिल की बात कह दी। जब सुरभि को मैंने अपने दिल की बात कही तो उसने मुझे कहां तुम इतने अच्छे हो भला तुम्हारे दिल की बात को मैं कैसे ठुकरा सकती थी। हम दोनों का रिश्ता चलने लगा था हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के बहुत नजदीक आ चुके थे सुरभि ने मुझे जब अपनी मां से मिलवाया तो मैं सुरभि की मां से मिलकर काफी खुश था। मुझे सुरभि की मां से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा सुरभि और मेरे बीच सब कुछ अच्छे से चलने लगा था और हम दोनों दूसरे के साथ रिलेशन में थे।

हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे थे हम दोनों के बीच अंडरस्टैंडिंग भी बहुत अच्छी हो गई थी। दोनों के अंडरस्टैंडिंग अच्छी हो चुकी थी इस वजह से सुरभि को मुझ पर पूरी तरीके से भरोसा हो चुका था। हम दोनों का रिलेशन काफी मजबूत होता चला गया हम दोनों जब भी एक दूसरे के साथ होते तो हम दोनों को अच्छा लगता। एक दिन सुरभि और मैं सुरभि के घर पर बैठे हुए थे उस दिन जब हम दोनो साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तो सुरभि मेरी तरफ देखने लगी। सुरभि के कजरारे नैन मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे कि वह मुझसे कुछ कहना चाहती हो। मुझे ऐसा ही कुछ लग रहा था मैंने जब सुरभि के नरम होठों पर अपनी उंगली को फेरा तो वह उत्तेजित होते हुए मेरी गोद में बैठ गई। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मेरे अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी। मेरे अंदर एक अलग ही आग पैदा हो गई थी सुरभि और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे। हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे मैंने अपने कपड़े उतार दिए और सुरभि से भी कपड़े उतारने को कहा तो उसने भी मेरे सामने कपड़े उतारे। जब उसने अपने कपड़े उतारे तो मै सुरभि को देखता ही रहा मैं सुरभि की तरफ देख रहा था सुरभि का नंगा बदन मुझे अपनी और खींच रहा था मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। जब मैं सुरभि के होठों को चूम रहा था तो मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ गई थी हम दोनों ही एक दूसरे के साथ संभोग करने के लिए तैयार हो चुके थे। मैंने सुरभि के स्तनों को चूसना शुरु कर दिया। मैंने उसको कहा मैं पूरी तरीके गरम हो चुका हूं। जब मैने सुरभि के होठों को चूमना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा मेरे अंदर की गर्मी बढ़ चुकी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। अब हम दोनों को ही लगने लगा था कि हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगे है।

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मैंने अपने लंड को बाहर निकाल कर हिलाया तो उसे मनीषा ने तुरंत अपने मुंह में ले लिया वह जिस प्रकार मेरे लंड को चूस रही थी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब सुरभि मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में ले रही थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। वह मेरे लंड को बडे अच्छे से सकिंग कर रही थी उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल दिया था। मुझे अब एहसास हो चुका था कि उसकी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी है वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही है। मैंने सुरभि को बिस्तर में लेटा दिया था मैं सुरभि के स्तनो का रसपान करने लगा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसके स्तनों का रसपान कर रहा था। मेरे अंदर की आग बढ़ने लगी थी सुरभि कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मै अब सुरभि की चूत को चाटना चाहता था।

मैंने सुरभि की चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैने सुरभि की चूत को चाटा और उसकी चूत को गिला कर दिया। जब उसकी चूत गिली हो गई तो मैंने सुरभि की चूत के अंदर लंड को धकेलते हुए डाला तो वह बड़ी जोर से चिल्लाई। सुरभि मुझे कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने सुरभि को कहा मेरे अंदर कि आग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। वह बोली मुझे चोदते जाओ मैं उसे तेज गति से धक्के दिए जा रहा था। उसकी सील पैक चूत से खून बाहर निकलने लगा था। मैने सुरभि की जांघो को अपने हाथों में उठा कर उसको चोदना शुरु किया। वह बहुत अच्छे से मेरा साथ दे रही थी वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ने की कोशिश करने लगी थी। मैं उसको बस चोदे जा रहा था वह खुश हो चुकी थी। मैंने सुरभि को तब तक चोदा जब तक उसकी चूत की गरमी शांत नही हो गई थी। मैंने उसकी चूत मारकर सुरभि को संतुष्ट कर दिया था।


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