ठंड मे गर्मी का एहसास करवा दिया

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Antarvasna, desi kahani:

Thand me garmi ka ehsas karwa diya मेरी शादी शुदा जिंदगी बिल्कुल भी अच्छे से नहीं चल रही थी मैं अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत ही परेशान था और मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मुझे क्या करना चाहिए। मैं कविता को तीन वर्ष पहले मिला था कविता और मेरी मुलाकात मेरे एक फैमिली फ्रेंड के माध्यम से हुई थी। जब मैंने कविता से पहली बार बात की तो मुझे कविता बहुत अच्छी लगी और उसके बाद से हम दोनों एक दूसरे से बात करते रहे। हम दोनों की बातें काफी होने लगी थी जिस वजह से मुझे भी लगने लगा कि मुझे कविता से शादी कर लेनी चाहिए। कविता और मैं शादी करने के बाद हम दोनों मुंबई आ गए जब हम लोग मुम्बई आए तो कविता चाहती थी कि वह भी जॉब करें और फिर कविता भी जॉब करने लगी थी। कविता की जॉब से मुझे कोई एतराज नहीं था लेकिन जब कविता घर पर देर से आने लगी तो मुझे उस बात से बड़ा एतराज होने लगा।

मैंने कविता को इस बारे में काफी बार कहा लेकिन कविता तो मेरी बात बिल्कुल भी नहीं सुनती थी वह मेरी बात समझने को तैयार भी नहीं थी। मैंने कविता को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन कविता मेरी बात बिल्कुल भी नहीं सुनती थी इसलिए मुझे भी एहसास होने लगा था कि मुझे कविता से अलग हो जाना चाहिए, मेरे पास भी कविता से अलग होने के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था। मैंने कविता से जब इस बारे में कहा तो कविता को इस बात से कोई एतराज नहीं था जैसे कि कविता ने पहले से ही इस बारे में सोच लिया था कि हम लोग एक दूसरे से अलग हो जाएं तो ही बेहतर होगा। कविता के मेरी जिंदगी से चले जाने के बाद मैं भी मुंबई से जॉब छोड़ कर अपने घर वापस लौट आया। मैं काफी समय तक तो कोई भी जॉब नहीं कर रहा था क्योंकि मैं अभी तक अपनी शादीशुदा जिंदगी से उभर भी नहीं पाया था। पापा और मम्मी ने मेरा बहुत सपोर्ट किया और उन्होंने कहा कि बेटा तुम कोई और लड़की देख कर शादी कर लो लेकिन मैं शादी के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं था मैं शादी नहीं करना चाहता था क्योकि कविता और मैं अब एक दूसरे से अलग हो चुके थे और हम दोनों की जिंदगी बिल्कुल अलग हो चुकी थी। कविता और मेरे डिवोर्स के बाद मैंने कभी भी कविता से संपर्क करने की कोशिश नहीं की।

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मुझे कभी भी ऐसा नही लगा कि हम लोगों ने 2 साल साथ में गुजरे क्योंकि हमारी शादी के टूट जाने के बाद सब कुछ और बिखर चुका था। पापा और मम्मी की वजह से मेरी जिंदगी अब सामान्य होने लगी और मैं लखनऊ में ही जॉब करने लगा। लखनऊ में मुझे एक छोटी कंपनी में जॉब मिल गई थी हालांकि मेरी तनख्वाह इतनी ज्यादा तो नहीं थी लेकिन फिर भी मैं अपनी जॉब से खुश था और मेरी जिंदगी अब अच्छे से चलने लगी थी। सब कुछ मेरी जिंदगी में सामान्य हो चुका था मेरी जिंदगी में खुशियां भी लौट आई थी मेरे परिवार ने मेरा बहुत ही सपोर्ट किया और सब कुछ अब उनकी वजह से ही ठीक हो चुका था जिस कॉलोनी में मैं रहता हूं उसी कॉलोनी में हमारे पड़ोस में रहने के लिए एक परिवार आया। वह कुछ दिनों पहले ही हमारे पड़ोस में रहने के लिए वह परिवार आया था हमारी उनसे ज्यादा बातचीत नहीं थी। एक दिन वह लोग हमारे घर पर आए और कहने लगे  हमारे बेटे की शादी तय हो गई है और उन्होंने मां को मिठाई का डब्बा दिया। उसके बाद उन लोगों से हमारा परिचय होने लगा उन लोगों से हमारा परिचय हो चुका था। उनकी बेटी माधुरी से मैं बातचीत करने लगा। माधुरी से बात करना मुझे अच्छा लगता और जब भी मैं उस से बातें शेयर करता तो मुझे काफी अच्छा महसूस होता। मुझे बहुत ही अच्छा लगता था और ऐसा लगता जैसे कि माधुरी मेरे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका में है। उसे मुझसे बात करना बहुत ही अच्छा लगने लगा था हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने लगे थे। एक दिन माधुरी ने मुझे कहा मैं तुम्हारे साथ मूवी देखने के लिए जाना चाहती हूं। मैंने भी माधुरी को मना नहीं किया और उस दिन हम दोनों ही मूवी देखने के लिए चले गए। माधुरी और मेरे बीच बढ़ती दोस्ती कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि अब मैं किसी से शादी करूं।

मैं अपने पैर पीछे खींचने की कोशिश करने लगा लेकिन माधुरी तो मेरे और भी नजदीक आती जा रही थी और उसे मेरा साथ अच्छा लगने लगा था लेकिन किसी तरीके से मैंने अब माधुरी से बात करना कम कर दिया था। मैं उसे कोई न कोई बहाना बनाकर दूरी बनाने की कोशिश करता हूं माधुरी को इस बात का अहसास नहीं था कि मैं उससे दूरी बनाने लगा हूं। एक दिन माधुरी ने मुझे फोन कर के कहा कि मुझे तुमसे मिलना है मेरे पास भी अब कोई रास्ता नहीं था इसलिए मैं माधुरी से मिला। जब मैं उस दिन माधुरी से मिला तो माधुरी ने मुझे अपने दिल की बात कही और कहा मुझे तुम्हारा साथ बहुत ही अच्छा लगता है। मैंने उस दिन माधुरी को कहा मुझे भी तुम्हारा साथ बहुत ही अच्छा लगता है लेकिन शायद तुम्हें यह बात नहीं पता कि मेरी शादी हो चुकी थी और मेरी शादी शुदा जिंदगी बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी इस वजह से मेरे और मेरी पत्नी के बीच डिवोर्स हो गया।

मैंने माधुरी को अपनी सारी बात बता दी तो माधुरी को भी मेरे शादी की बात मालूम हो चुकी थी कि मैं शादीशुदा हूं लेकिन माधुरी को कोई एतराज नहीं था। माधुरी मुझे कहने लगी मुझे कोई एतराज नहीं है और मुझे नहीं लगता कि तुम कहीं भी गलत हो। मैंने माधुरी को कहा लेकिन अगर मैं तुम्हारे पापा से बात करूं तो शायद वह लोग भी हमारी शादी के लिए कभी तैयार नहीं होंगे। हम दोनों रिलेशन में थे और हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो थे ही लेकिन हमने अपने रिलेशन के बारे में किसी को भी नहीं बताया था और ना ही हम लोग किसी को इस रिलेशन के बारे में बताना चाहते थे। माधुरी और मेरे रिलेशन को 1 वर्ष हो चुका था और इन 1 वर्षों में माधुरी और मैं बहुत ज्यादा नजदीक आ चुके थे। हम दोनों के बीच बहुत ज्यादा प्यार होने लगा था। माधुरी ने मुझे कहा क्या हम लोगों को शादी कर लेनी चाहिए लेकिन मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं था और ना ही मैं शादी करना चाहता था मदुरई इस बात को अच्छे से जानती थी लेकिन उसके बावजूद भी वह मेरे साथ बड़े ही अच्छे से अपना समय बिताया करती।  हम दोनो एक दूसरे को हमेशा खुश रखने की कोशिश करते। एक दिन बहुत ठंड हो रही थी उस दिन मैने माधुरी को घर पर फोन करके बुलाया तो वह आ गई। जब माधुरी आई तो वह मुझे कहने लगी आज तुमने मुझे घर पर बुला लिया मैने माधुरी से कहा बिस्तर पर आ जाओ तो वह बिस्तर पर आ गई। अब वह बिस्तर पर आ गई थी हम दोनो साथ मे थे घर पर कोई नहीं था। घर पर कोई भी नही था और हम दोनो अब साथ मे थे ठंड मे जब मेरा हाथ माधुरी के गाल पर लगा तो वह मचल ऊठी। मैंने माधुरी को किस कर लिया मैंने जब माधुरी के होंठो को चूमा तो वह उत्तेजित हो गया। वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है मैं और माधुरी एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तडपने लगे। हम दोनों की तडप इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैंने माधुरी के स्तनों को दबाना शुरू किया। जब मैं उसके स्तनों को दबा रहा था तो मुझे मजा आ रहा था माधुरी को बड़ा मजा आ रहा था।

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उसने जब मेरे मोटे लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और माधुरी को भी बड़ा मजा आने लगा था। माधुरी के अंदर की गर्मी बढ़ चुकी थी और उसने मुझे कहा मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं। मैंने माधुरी के सामने अपने लंड को किया उसने उसे अपने मुंह में लेना शुरू किया तो मुझे गर्मी का एहसास होने लगा था। हम दोनों पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे मुझे साफ तौर पर पता चल चुका था कि मैं बिल्कुल नहीं पाऊंगा। मैने माधुरी को महसूस करना शुरू किया हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे। हम दोनों को ही मजा आने लगा था और हमारे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ने लगी कि हम दोनों एक दूसरे को महसूस करना चाहते थे। मैंने जब माधुरी की गर्म चूत पर अपने लंड को लगाया तो माधुरी पूरी तरीके से तडपने लगी।

वह मुझे कहने लगी तुम मेरी योनि को कुछ देर चाट लो। मैंने माधुरी के चूत को चाटना शुरु किया मुझे मजा आने लगा था। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था हम दोनों की उत्तेजना बढ चुकी थी और मेरी उत्तेजना अब इस कदर बढ़ गई कि मैंने माधुरी से कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाऊंगा। वह इस बात को समझ चुकी थी कि अब हम दोनों ही बिल्कुल रह नहीं पाएंगे इसलिए मैंने भी अपने मोटे लंड को माधुरी की चूत के अंदर घुसा दिया। जब उसकी चूत के अंदर मैंने लंड को घुसाया तो मुझे बहुत ही मजा आ गया। माधुरी की योनि से खून निकलने लगा था और मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था माधुरी को इतना ज्यादा मजा आने लगा था कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही मैं बिल्कुल भी रह पा रहा था। हम दोनों एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे। माधुरी की योनि से निकलता हुई गर्मी मेरे अंदर की गर्मी को और बढ़ा रही थी। 10 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे के साथ चुदाई का मजा लिया फिर मैंने अपने माल को माधुरी की चूत मे गिरा दिया था और उसकी इच्छा को पूरा किया। माधुरी ने ठंड में भी गर्मी का एहसास करवा दिया था।


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