चोदकर चेहरा खिल ऊठा

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चोदकर चेहरा खिल ऊठा

Antarvasna, hindi sex story:

Chodkar chehra khil utha पापा और मम्मी अपनी नौकरी में ही बिजी रहते हैं वह दोनों स्कूल में अध्यापक हैं इसलिए वह बचपन से ही कभी मुझे समय नहीं दे पाए। कॉलेज की पढ़ाई हो जाने के बाद मैंने भी जॉब करनी शुरू कर दी मैं एक कॉल सेंटर में जॉब करता हूं। मैं जिस कॉल सेंटर में जॉब करता हूं वहां पर मेरी मुलाकात रचना के साथ हुई रचना एक बेहद गरीब परिवार से है रचना ही अपने घर की सारी जिम्मेदारी को संभाले हुई थी। रचना के अंदर की अच्छाई मुझे हमेशा ही अपनी ओर आकर्षित करती थी और मैं रचना की तरफ खींचा चला गया लेकिन किसी वजह से रचना ने नौकरी छोड़ दी और वह घर पर ही रहती थी। मेरी जिंदगी में बचपन से ही प्यार का भाव था क्योंकि पापा और मम्मी ने कभी भी मुझे वह प्यार किया नहीं जो कि मैं उनसे चाहता था इसलिए रचना से मैं अपने दिल की बात कहना चाहता था। मैंने रचना को फोन किया तो उसने मेरा फोन उठा लिया वह मुझसे कहने लगी कि हां आकाश कहो तुम्हे क्या कहना था, मैंने रचना से कहा कि मुझे तुमसे मिलना है।

मैंने रचना को मिलने के लिए बुलाया तो रचना भी मुझसे मिलने को तैयार थी जब रचना मुझसे मिलने आई तो हम दोनों एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे और वहां पर हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे। मैंने रचना को अपने बारे में सब कुछ बता दिया और उसके बाद मैंने उससे कहा की मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ। मुझे पता ही नहीं चला कि मेरे अंदर कहां से इतनी हिम्मत आ गई कि मैंने रचना अपने दिल की बात कह दी और रचना ने भी तुरंत मेरे रिश्ते को स्वीकार कर लिया। रचना चाहती थी कि हम दोनों  शादी कर ले लेकिन मैंने रचना से कहा कि क्या तुम्हारे परिवार वाले मेरे साथ तुम्हारी शादी के लिए मान जाएंगे तो रचना कहने लगी कि क्यों नहीं मैं उनसे जरूर इस बारे में बात करूंगी। मैंने रचना से अपने दिल की बात कह दी थी लेकिन मुझे पूरी उम्मीद थी कि रचना के परिवार वाले भी मेरे और रचना के रिश्ते को स्वीकार कर लेंगे। जब रचना ने मेरे बारे में अपने घर वालो को बताया तो वह लोग भी रचना और मेरे बीच के रिश्ते को स्वीकार कर चुके थे।

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मैंने भी अपने पापा और मम्मी से इस बारे में कहा तो उन्होंने भी रचना को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था उन्हें कोई भी हमारे रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं था। उसके बाद हम दोनों की शादी होने वाली थी हम दोनों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और फिर हम दोनों पति-पत्नी बन चुके थे। मैं रचना के साथ बहुत ही अच्छा समय बिता रहा था हम दोनों शादी के बाद घूमने के लिए शिमला भी गए। मैं चाहता था कि रचना को मैं हमेशा वह खुशी दूँ जिसकी वह हकदार है। मैं रचना को हमेशा खुश रखता और रचना भी मुझसे बहुत खुश थी हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं। शादी के कुछ समय बीतने के बाद रचना चाहती थी कि वह जॉब करें मैंने भी रचना से कहा कि अगर तुम्हें जॉब करनी है तो तुम जॉब कर सकती हो। रचना भी नौकरी की तलाश में थी क्योंकि वह घर में अकेले काफी बोर हो जाया करती थी जिससे कि उसे लगने लगा था कि अब उसे भी नौकरी करनी चाहिए। रचना नौकरी की तलाश में थी और उसे जल्द ही जॉब मिल गई उसके बाद वह जॉब करने लगी थी। रचना जिस कंपनी में जॉब कर रही थी वह मेरे ऑफिस के बिल्कुल सामने ही था इसलिए हम दोनों साथ में ही ऑफिस जाते और साथ में ही वापस घर लौटा करते थे। कुछ समय बीतने के बाद मैंने भी अपना एक नया स्टोर खोलने के बारे में सोचा लेकिन उसके लिए मुझे पैसों की जरूरत थी। जब मैंने पापा और मम्मी से इस बारे में बात की तो वह लोग मेरी बात मान गए और उन्होंने मुझे पैसे दे दिए थोड़े बहुत पैसे मैंने मैसेज किए हुए थे जिससे कि मैंने अपना बिजनेस शुरू किया। मेरा बिजनेस भी बाद में अच्छा चलने लगा, मुझे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा था जिससे कि मैं बहुत खुश हो गया था और रचना भी काफी खुश थी। रचना हमेशा ही मेरी बातों को मानती और जब भी मुझे रचना की जरूरत होती तो वह मेरा साथ हमेशा ही देती। एक दिन रचना और मैं साथ में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो रचना ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए घर जा रही है। मैंने रचना को कहा कि ठीक है तुम कुछ दिनों के लिए घर हो आओ। काफी दिन हो गए थे वह अपने मायके भी नहीं गई थी तो फिर रचना अपने मायके चली गई।

रचना अपने मायके जा चुकी थी और मैं भी अपने काम पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था मैं अपने काम के प्रति पूरी तरीके से समर्पित था और अपने काम को मैं अच्छे से आगे बढ़ाना चाह रहा था। रचना को अपने मायके गए हुए काफी दिन हो गए थे मैंने रचना को फोन किया और उसे कहा कि तुम घर वापस कब आ रही हो तो वह मुझे कहने लगी कि मैं कल आ रही हूं। रचना को अपने मायके गए हुए करीब 15 दिन हो गए थे वह 15 दिनों से ऑफिस भी नहीं गई थी। मैंने रचना को कहा कि ठीक है तुम आ जाओ और फिर वह अगले दिन घर आ गई जब रचना घर आई तो मुझे काफी अच्छा लग रहा था क्योंकि रचना के बिना मैं भी अकेला बोर हो रहा था। रचना घर आ चुकी थी और उस दिन रचना मुझे कहने लगी कि चलो आज हम लोग मूवी देखने चलते हैं। हम दोनों उस दिन मूवी देखने के लिए चले गए, जब हम लोग मूवी देखने गए तो वहां से हम लोग सीधे ही वापस घर लौट आये थे।

उस वक्त काफी ज्यादा शाम हो चुकी थी पापा मम्मी भी घर लौट चुके थे और काम करने वाली मेड भी खाना बना रही थी तो हम सब लोग साथ में बैठे हुए थे। काफी दिनों बाद पापा और मम्मी के साथ मैं और रचना बात कर पा रहे थे क्योंकि उन लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं होता है इसलिए उन लोगों से हमारी ज्यादा बात नहीं हो पाती है। उस दिन हम लोग आपस मे बात कर रहे थे और हम लोगों ने डिनर भी साथ में ही किया। डिनर करने के बाद रचना और मैं साथ में बैठे हुए थे हम लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मुझे काफी अच्छा लग रहा था। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैंने रचना का हाथ को पकडकर अपनी बाहों में उसे ले लिया। रचना मेरी बाहों में आ चुकी थी जब वह मेरी बाहों में आई तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करना चाहते थे। मैंने रचना के बदन की गर्मी को महसूस करना शुरू कर दिया था मैं और रचना एक दूसरे की गर्मी को महसूस कर रहे थे। अब हम दोनों पूरी तरह से गरम हो चुके थे इसलिए ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था और ना ही रचना। मैंने रचना के होंठो को चूमना शुरू कर दिया। काफी समय बाद हम दोनों के बीच सेक्स हो रहा था क्योंकि काफी दिन हो गए थे रचना भी अपने मायके गई हुई थी और मै भी बिजी था, मैं अपने काम के चलते बहुत ज्यादा बिजी था इसलिए काफी लंबे अरसे बाद हम दोनों के बीच संबंध बन रहे थे। मै बहुत ही ज्यादा खुश था मैंने उसके बदन को ऊपर से लेकर नीचे तक महसूस किया। मैं और रचना एक दूसरे के बदन की गर्मी को पूरी तरीके से महसूस कर रहे थे। अब ना तो मै रह पाया और ना ही रचना। मैंने रचना के कपड़े उतार दिए थे। रचना ने मुझसे कहा मैं तुम्हारे लंड को सकिंग करना चाहता था। रचना ने मेरे मोटे लंड को चूसना शुरू कर दिया जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। वह जिस प्रकार से मेरे मोटे लंड को चूस कर उसकी गर्मी को बहार निकाल रही थी उससे मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी मै तडपने लगा था।

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मुझसे बिल्कुल भी रह नहीं जा रहा था मैंने रचना को कहा मुझसे रहा नहीं जा रहा है। अब लह मेरे लंड से पानी बाहर निकाल चुकी थी मैंने भी रचना के स्तनों को चूसना शुरू किया। रचना और मेरे बीच इस से पहले भी ना जाने कितनी ही बार शारीरिक संबंध बन चुके थे लेकिन इस बार ज्यादा ही मजा आ रहा था। जब मैं रचना के स्तनों को चूस रहा था तो मैंने उसके स्तनो से खून बाहर निकाल दिया था। रचना को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था रचना के अंदर गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैंने रचना को कहा मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी है। रचना ने मुझे कहा मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो। रचना ने अपनी योनि के अंदर उंगली डाली। मैंने रचना की चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया था। रचना जोर से चिल्ला रही थी रचना की जोरदार सिसकारियां मुझे अपनी ओर आकर्षित करती। वह मुझे बहुत ज्यादा गर्म कर रही थी उसके अंदर से निकलती हुई आग मेरे अंदर की गर्मी को बढा चुकी थी। मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मैंने रचना को कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। वह मुझे कहने लगी रह तो मैं भी नहीं पा रही हूं। अब हम दोनों एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे कुछ देर तक तो मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर मजे लिए।

जब मैंने रचना को घोड़ी बनाकर चोदना शुरु किया तो रचना की चूत मे मेरा माल गिर चुका था। मैं दोबारा से रचना के साथ संबंध बनाना चाहता था। मैंने दोबारा से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए उसे बहुत ही ज्यादा देर तक चोदा। मैं जब उसे चोदता तो मुझे बहुत ही मजा आता रचना और मैं एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का जमा ले रहे थे। जब मै रचना कि चूतडो पर प्रहार कर रहा था तो वह भी मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाए जा रही थी। जिससे की रचना की चूत का रंग पूरी तरह से लाल होने लगा। मेरे अंदर से निकलती हुई गर्मी अब बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने रचना से कहा मैं अब तुम्हारी योनि के अंदर अपने वीर्य को गिरा रहा हूं। रचना ने कहा हां जल्दी से तुम अपने माल को मेरी चूत मे गिरा कर मुझे शांत कर दो। रचना के अंदर से निकलती हुए गर्मी को मैंने शांत कर दिया वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी जब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने माल को गिराया।


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