चुदाई की मस्ती मे खो गया

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Sex stories in hindi, antarvasna: एक शाम मैं घर लौटा उस दिन जब मैं घर लौटा तो मेरी मां की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुम मेरे लिए दवा ले आना। मैंने मां से कहा मां आखिर हुआ क्या है तो उन्होंने मुझे बताया कि मुझे काफी तेज बुखार है। घर पर कोई भी नहीं था मेरी पत्नी भी अपने मायके गई हुई थी इसलिए मैं ही तुरंत मां को अपने साथ पास के ही क्लीनिक में लेकर गया तो डॉक्टर ने वहां पर मां को दवाइयां दी। मां को डॉक्टर ने दवाइयां दे दी थी और उसके बाद मां ने मुझे कहा कि बेटा मैं अब आराम कर लेती हूं। मां अपने रूम में चले गए और वह आराम करने लगे मैंने भी खाना बाहर से ही मंगवा लिया था, जब मैंने खाना बाहर से मंगवाया तो उसके बाद मैंने मां से खाना खाने के लिए कहा तो उन्होंने मुझे मना कर दिया इसलिए मुझे अकेले ही खाना खाना पड़ा। अगले दिन सुबह मां की तबीयत पहले से बेहतर थी और उन्होंने मुझे कहा कि अब मेरी तबीयत पहले से बेहतर है।

अगले दिन मुझे ऑफिस जाना था तो मैं अपने ऑफिस चला गया और फिर मैंने अपनी पत्नी को फोन किया जब मैंने अपनी पत्नी सुहानी को फोन किया तो वह मुझे कहने लगी कि मैं आज ही घर आ जाती हूं। मैंने उसे मां की तबीयत खराब होने के बारे में बताया तो वह मुझे कहने लगी कि मैं आज ही घर लौट आती हूं मैंने उसके बाद फोन रख दिया और मैं ऑफिस में अपना काम करने लगा। जब मैं दोपहर के वक्त कैंटीन में गया तो मैंने कैंटीन में कॉफी ऑर्डर की और मैं कॉफी पी रहा था मेरे साथ में हीं काम करने वाला निखिल मेरे पास आकर बैठा और कहने लगा कि आज कल ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम है। मैंने निखिल से कहा कि हां निखिल आज कल ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम है मैं और निखिल एक दूसरे से बातें कर रहे थे जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मैंने निखिल को कहा यह तो तुम ठीक कह रहे हो की आज कल ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम है। जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो निखिल ने मुझे बताया कि वह हमारे ऑफिस में सुजाता को पसंद करता है मैंने निखिल को कहा कि लेकिन इससे पहले तो तुमने मुझे कभी इस बारे में नहीं बताया। सुजाता निखिल को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी और वह निखिल के साथ ज्यादा बात भी नहीं करती थी क्योंकि उसे लगता था कि निखिल हर किसी के साथ फ्लर्ट करता है इसलिए वह निखिल से काफी कम बातें किया करती थी। मैंने निखिल को समझाया और कहा कि निखिल अगर तुम्हें सुजाता का दिल जीतना है तो तुम्हें उसके लिए अपनी आदतों को बदलना पड़ेगा। निखिल मुझे कहने लगा कि रोहित तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मुझे भी अब लग रहा है कि मुझे अपनी आदतों में बदलाव करना पड़ेगा उस दिन के बाद निखिल ने अपनी आदतों में बदलाव करना शुरू किया और वह सुजाता के दिल में अपने लिए जगह बनाता चला गया। एक दिन सुजाता को निखिल ने अपने दिल की बात कह दी तो सुजाता भी अब निखिल को मना ना कर सकी और उन दोनों का रिलेशन चलने लगा।

निखिल और सुजाता एक दूसरे के साथ काफी खुश थे और वह दोनों एक दूसरे के साथ बहुत अच्छे से अपने रिलेशन को चला रहे थे उन दोनों की खुशी देखकर मुझे भी कई बार लगता की उन दोनों को अब शादी कर लेनी चाहिए। एक दिन हम लोग कैंटीन में बैठे हुए थे तो उस दिन मैंने निखिल से कहा कि तुम और सुजाता शादी क्यों नहीं कर लेते तो निखिल कहने लगा कि मैं तो चाहता हूं कि मैं सुजाता से शादी कर लूं। सुजाता भी शायद इस बात को गंभीरता से लेने लगी थी और वह भी निखिल के साथ शादी करने के लिए तैयार थी उसे भी निखिल के साथ शादी करनी थी और जल्द ही उन दोनों की शादी हो गयी। जब उस दोनों की शादी हुई तो उसके बाद सुजाता ने ऑफिस भी छोड़ दिया था वह ऑफिस नहीं आती थी क्योंकि उसे लगता था कि अब उसे घर की जिम्मेदारियों को संभालना चाहिए। निखिल और सुजाता को भी मैं मिलने जाता रहता था जब भी मैं उन दोनों को मिलने के लिए जाता तो मुझे अच्छा लगता। मैंने उन लोगो को अपने घर पर भी इनवाइट किया था सुजाता मेरी पत्नी से बहुत ज्यादा प्रभावित हुई और जब भी वह घर आती तो हमे बहुत अच्छा लगता था। मैं और निखिल एक दूसरे के साथ अपनी बातों को शेयर कर लिया करते है हम लोग जब भी अपनी बातों को एक दूसरे से शेयर करते तो हमें काफी अच्छा लगता। मुझे भी बहुत अच्छा लगता जब भी मैं निखिल से अपनी परेशानियों को साझा किया करता था। निखिल ने मेरी उस वक्त काफी मदद की थी जब मेरी मां बीमार थी उस वक्त निखिल ही मेरे साथ हॉस्पिटल में था और उसने मां की देखभाल भी की।

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मेरे लिए अकेले यह सब कर पाना संभव नहीं था लेकिन निखिल ने उस वक्त मेरा काफी साथ दिया और मैं बहुत ज्यादा खुश था कि निखिल ने मेरा इतना साथ दिया। सुजाता और निखिल ने एक दिन मुझे कहा कि तुम और भाभी घर पर आ जाना मैंने निखिल से कहा कि ठीक है मैं और तुम्हारी भाभी घर पर आ जाएंगे। हम लोग उस दिन निखिल और सुजाता से मिलने के लिए उनके घर पर चले गए रास्ते से मैंने निखिल और सुजाता के लिए गिफ्ट ले लिया था। जब हम लोग उनके घर पहुंचे तो वह लोग हमारा इंतजार कर रहे थे उन्होंने ज्यादा किसी को नहीं बुलाया था उन लोगो ने सिर्फ मुझे और मेरी पत्नी को इनवाइट किया था और उनकी फैमिली के कुछ लोग थे। उन्होंने घर पर एक छोटी सी पार्टी का अरेंजमेंट किया था सुजात उस दिन काफी खुश थी और उसके बाद हम लोग भी अपने घर लौट आए जब हम लोग अपने घर लौटे तो काफी ज्यादा देर हो चुकी थी। जब हम लोग घर पहुंचे तो मां अपने कमरे में सोई हुई थी।मै अगले दिन अॉफिस जाता हूं तो रास्ते मे मुझे महिमा भाभी मिलती है। महिमा का चरित्र सबको ही पता था वह कैसी है। मै जब उनसे मिला तो वह मुझसे बाते करने लगी।

मुझे उन्होने रात को घर बुला लिया जब उन्होने मुझे अपने घर पर आने के लिए कहा तो मै भी घर रात के वक्त उनके घर पर गया उनके पति घर पर नहीं थे। मै बहुत खुश था जब वह मुझे अपनी और खीच रही थी। भाभी के अंदर सेक्स को लेकर आग लगी हुई थी और मेरे अंदर भी आग जल रही थी। मैंने भाभी को देखते ही उनके बदन को सहलाने लगा। मै उनके बदन की गर्मी को बढ़ाता चला जा रहा था। भाभी के बदन की आग जल चुकी थी उनकी गर्मी बहुत बढने लगी थी। मैं अब बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगा था। मैं अब पूरी तरीके से जोश में आ चुका था मैंने भाभी को कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वह मुझे बोली मेरे होंठो को भी चूस लो। मैने उनके होंठो को चूमना शुरु कर दिया था और मै बहुत ज्यादा खुश था। इस से पहले भाभी के होंठो को ना जाने कितने ही लोगो ने चूसा था। अब मै भाभी के होठों से अपने होंठो को टकराने लगा था। मैने अपने हाथो को भाभी के स्तनों की तरफ बढाया और जब मैं उनके स्तनों को दबाता तो उनको मजा आ रहा था। भाभी बोली अब मत तडपाओ मुझे मै तडप रही हूं। भाभी बोली मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। भाभी के स्तनो को दबाने से उनके स्तनो की गर्मी बढ रही थी और हम दोनों के अंदर की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। मैंने भाभी से कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। वह भी तडप रही थी वह कहने लगी अच्छा तो मुझे भी बहुत लग रहा है। मैंने उनके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था भाभी के अंदर की आग बढ चुकी थी। उनके अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ती जा रही थी अब वह अपने आपको रोक नही पा रही थी और मै भी अपने आपको रोक ना सका मैने अपने लंड को बाहर निकाला। भाभी ने मेरे लंड को देखा और वह मेरे लंड को हिलाने लगी। जब वह मेरे लंड को अपने कोमल हाथो से हिलाया तो उनको मजा आने लगा और मुझे भी मजा आने लगा। अब मेरे अंदर एक अलग ही आग पैदा होती जा रही थी और मैं भाभी को कहता मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने भी उनके कपड़ों को उतार दिया था जब मैंने उनके कपड़ों को उतारा तो उनका नंगा बदन देखकर मैं खुश था और मै अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया।

मुझे ऐसा लगने लगा था मुझे भाभी की चूत के अंदर अपने लंड को घुसा देना चाहिए। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुस दिया था भाभी की चूत की गहराइयो मे मेरा लंड खो गया था और जब मेरा लंड उनकी चूत में घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाती हुई मुझे कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। महिमा भाभी की चूत का जादू कमाल था और मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब मै भाभी की चूत मार रहा था और वह सिसकारियां ले रही थी। मेरे लंड ने भी अब मेरा साथ छोडना शुरु कर दिया था क्योंकि वह चूत के मजे जमकर ले रहा था। मेरा माल गिरा तो भाभी खुश हो चुकी थी वह मुझे बोली मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई है। भाभी बोली मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैने दोबारा अपने लंड को भाभी की चूत मे पेल दिया था। मेरा लंड उनकी चूत में घुसा तो मेरे लंड और उनकी चूत से एक अलग ही प्रकार की आवाज निकल रही थी। मैंने अपने लंड को बड़ी ही तेजी से उनकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और उसे चोदना शुरु कर दिया था।

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मैं भाभी को जिस तरह से तेज गति से धक्के मार रहा था वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। वह मेरे साथ सेक्स का जमकर मजा ले रही थी और मुझे उनको चोदने में बड़ा आनंद आ रहा था। मैं भाभी को लगातार तीव्र गति से चोद रहा था वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैं उनकी चूत बड़े अच्छे से मार रहा था और मेरे अंदर की गर्मी कहीं ना कहीं पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मेरे चोदने की गति में और भी तेजी आने लगी थी और मेरा लंड बहुत मोटा होने लगा था। मुझे एहसास होने लगा था मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका है और मेरा माल भी गिरने को था। जब मैंने अपने वीर्य की पिचकारी से भाभी की चूत को नहला दिया तो वह खुश हो गई थी। मैने उनके साथ 3 बार चुदाई का मजा लिया और भाभी खुश हो गई थी।


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