मेरे लंड की इच्छा

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मेरे लंड की इच्छा

Antarvasna, kamukta:

Mere lund ki ichchha मैं अपनी शॉप में बैठा हुआ था उस दिन मैं काफी ज्यादा परेशान था क्योंकि उस दिन काम कुछ भी नहीं हो रहा था इसलिए मैंने सोचा कि मैं जल्दी ही घर चला जाता हूं। मैं उस दिन जल्दी घर चला गया मौसम भी काफी ज्यादा अच्छा था और काफी ज्यादा बारिश हो रही थी। मैं जब घर पहुंचा तो मां ने मुझे कहा कि बेटा मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं मैंने मां से कहा हां मां मेरे लिए तुम चाय बना दो। मां ने मेरे लिए चाय बनाई, जब मां ने मेरे लिए चाय बनाई तो मैं और मां साथ में बैठे हुए थे हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे और चाय पी रहे थे।

पापा के देहांत के बाद मां ने ही मेरी परवरिश की और उन्होंने मुझे कभी भी कोई कमी नहीं रहने दी। मैं और मां साथ में ही बैठे हुए थे और हम दोनों ने उस दिन काफी देर तक एक दूसरे से बात की। मां मुझे कहने लगी कि महेश बेटा तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए मैंने मां से कहा कि हां मां मुझे मालूम है मुझे शादी कर लेनी चाहिए लेकिन मुझे थोड़ा वक्त चाहिए। मां कहने लगी कि बेटा फिर भी तुम शादी कर लो अब तुम्हारी उम्र भी होने लगी है।

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मैं उम्र के 30 वर्ष में पहुंच चुका था और मुझे भी लगने लगा था कि मुझे शादी कर लेनी चाहिए। मां ने मेरे लिए रिश्ते ढूंढना भी शुरू कर दिया था लेकिन अभी तक मुझे कोई अच्छा रिश्ता नहीं मिल पाया था जिससे कि मैं शादी कर पाता। मुझे कोई भी ऐसी लड़की समझ नहीं आई थी जिससे मैं शादी कर पाता। मैं एक दिन अपनी दुकान पर ही था और उस दिन दुकान में एक लड़की आई वह दिखने में बड़ी ही सुंदर थी और बहुत ही अच्छे से वह बात कर रही थी। उसने मुझसे थोड़ी देर बाद की और कहा कि क्या आपकी दुकान में बच्चों के कपड़े मिल जाएंगे तो मैंने उसे कहा कि हां क्यों नहीं और मैं उसे अपनी शॉप में कपड़े दिखाने लगा उसने कपड़े खरीदे और वह वहां से चली गई। अगले दिन वह फिर दोबारा से आई और उसने मुझसे एक जोड़ी और कपड़े लिए।

मैंने उस लड़की से पूछा कि तुम किसके लिए कपड़े लेकर जा रही हो तो उसने मुझे बताया कि उसकी दीदी का छोटा लड़का है और वह उन्हीं के साथ रहती है। मैंने उस लड़की का नाम पूछा तो उसने मुझे अपना नाम बता दिया उसका नाम शिप्रा है। शिप्रा मेरी दुकान में अक्सर आने लगी थी वह जब भी दुकान में आती तो मुझे बहुत अच्छा लगता है और शिप्रा को भी बड़ा अच्छा लगता है। 

हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छे से बातें करने लगे थे और मुझे पता ही नहीं चला कि कब शिप्रा और मेरे बीच में इतनी अच्छी दोस्ती हो गई कि हम दोनों एक दूसरे के बिना रह भी नहीं पाते थे। मैं जिस दिन भी शिप्रा से बात नहीं करता तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और ना ही शिप्रा को अच्छा लगता लेकिन समय के साथ साथ अब सब कुछ बदलता जा रहा था और मुझे शिप्रा का साथ मिलने लगा था। एक दिन मैंने शिप्रा को अपने प्यार का इजहार कर ही दिया। जब मैंने शिप्रा से अपने प्यार का इजहार किया तो वह भी कहीं ना कहीं मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर चुकी थी। जिस तरीके से मैं शिप्रा के साथ में रिलेशन में था उससे मुझे बड़ा ही अच्छा लगता और शिप्रा को भी बहुत ही अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताया करते हैं। शिप्रा को अपने करियर की बहुत ज्यादा चिंता थी और वह अब नौकरी करने के लिए बेंगलुरु चली गई थी।

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शिप्रा मुझसे दूर जा चुकी थी मैंने शिप्रा को काफी समझाने की कोशिश की कि तुम बेंगलुरु मत जाओ लेकिन शिप्रा ने मेरी एक बात नहीं मानी और वह बेंगलुरु चली गई। शिप्रा की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद वह बैंगलुरु चली गई। शिप्रा के परिवार में कोई भी नहीं है क्योंकि शिप्रा के मातापिता का देहांत काफी साल पहले हो चुका था इसलिए उसके चाचा ने हीं उसकी परवरिश की है और उसके बाद वह अपनी दीदी के साथ रहने लगी थी। शिप्रा अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी मैंने भी हमेशा शिप्रा का साथ दिया लेकिन अब मुझे भी लगने लगा था कि शिप्रा कहीं मुझसे दूर ना हो जाए।

एक दिन मैंने शिप्रा से फोन पर बात की, हम दोनों उस दिन फोन पर एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लग रहा था जब हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें करते। मैंने शिप्रा को कहा कि मुझे तुमसे मिलना है शिप्रा मुझे कहने लगी कि महेश अभी मिल पाना तो मुश्किल होगा लेकिन फिर भी मैं कोशिश करूंगी कि मैं कुछ दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी ले लूं और तुमसे मिलने के लिए पुणे आ जाऊं। मैंने शिप्रा को कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए यहां आ जाओ तो शिप्रा ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें शाम तक इस बारे में बताती हूं।

मैं शिप्रा से मिलना चाहता था शिप्रा ने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और वह मुझसे मिलने के लिए पुणे आ गई। जब शिप्रा मुझसे मिलने के लिए पुणे आई तो मैंने शिप्रा से शादी करने के बारे में सोच लिया था। शिप्रा को मैंने कहा कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं लेकिन शिप्रा मुझसे शादी करना नहीं चाहती थी उसे थोड़ा समय चाहिए था। मैंने शिप्रा को समझाने की कोशिश की और उसे कहा कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं लेकिन शिप्रा ने कहा कि मुझे थोड़ा समय चाहिए। शिप्रा मुझे कहने लगी कि मैं भी तुमसे शादी करना चाहती हूं। शिप्रा अपने फ्यूचर को लेकर बहुत ही ज्यादा सीरियस थी और वह चाहती थी कि वह थोड़े समय बाद मुझसे शादी करे लेकिन अब यह बात मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी और हम दोनों के बीच में भी इस बात को लेकर झगड़े होने लगे थे।

शिप्रा भी बेंगलुरु चली गई थी लेकिन मैं उससे अभी भी बात करता था। हम दोनों के बीच में झगड़े बहुत ज्यादा बढ़ने लगे थे और इसकी वजह यही थी कि मैं शिप्रा से शादी करना चाहता था लेकिन शिप्रा को थोड़ा समय चाहिए था। मैंने शिप्रा को अब मिलने का फैसला किया मैं उसको मिलने के लिए बेंगलुरु चला गया। मैं उस दिन शिप्रा के फ्लैट में ही रुका हुआ था। शिप्रा और मैं उस रात साथ में थे मैं शिप्रा से बातें कर रहा था। मैंने शिप्रा को काफी समझाने की कोशिश की उसे मुझसे शादी कर लेनी चाहिए लेकिन शिप्रा मेरी बात कहां मानने वाली थी उस दिन जब हम दोनों ने एक दूसरे को किस किया तो शायद शिप्रा भी अपने आपको नहीं रोक पाई। वह बहुत ज्यादा गरम हो गई थी मैंने शिप्रा को बिस्तर पर लेटा दिया था।

वह इतनी ज्यादा गर्म होने लगी थी वह बिल्कुल भी नहीं रह पा रही थी। शिप्रा के स्तनों को मैं जिस तरीके से दबा रहा था वह बहुत ही ज्यादा गर्म होती चली गई। मैंने शिप्रा को कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को इतना ज्यादा बढ़ा दिया था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाया और ना ही शिप्रा अपने आपको रोक पाई। शिप्रा ने अपने कपड़ों को खोल दिया मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। जब मैंने अपने कपडो को खोल दिया तो उसके बाद मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। 

उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया वह बहुत अच्छे तरीके से मेरे लंड को चूसने लगी जिस तरीके से वह मेरे लंड को चूस रही थी उससे मुझे गर्मी का अहसास हो रहा था और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। वह बिल्कुल भी नहीं रह पा रही थी। मैंने जैसे ही शिप्रा की चूत को चाटना शुरू किया तो वह गरम होने लगी। शिप्रा को भी बड़ा अच्छा लगने लगा था वह गर्म होती जा रही थी। मुझे भी गर्मी का एहसास हो रहा था।

मैंने शिप्रा की चूत को बहुत देर तक चाटा उसकी चूत पर लगे सारे पानी को मैंने अपने अंदर ही ले लिया जिसके बाद वह गर्म हो गई और मुझे कहने लगी अब तुम अपने लंड को मेरी योनि में घुसा दो। मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाया मैं इस बात को अच्छे से समझ चुका था। मैंने जब उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह जोर से चिल्ला कर मुझे बोली तुमने मेरी चूत में दर्द कर दिया है। शिप्रा की योनि में दर्द होने लगा था लेकिन मुझे नहीं मालूम था उसकी चूत मे लंड डालकर मुझे सुकून आ जाएगा।

जब उसकी चूत से खून बाहर की तरफ को निकलने लगा तो मुझे मजा आने लगा था और शिप्रा को भी बड़ा मजा आ रहा था। वह मेरा साथ दे रही थी हम दोनों एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे। मैं और शिप्रा एक दूसरे का साथ अच्छे से दिए जा रहा थे। मेरा लंड शिप्रा की योनि के अंदर बाहर हो रहा था। शिप्रा से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। वह कहने लगी मेरी गर्मी को तुमने बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। 

अब उसकी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी मैं उसे बड़ी तेज गति से चोदे जा रहा था। मै उसे जिस तेज गति से चोद रहा था वह बहुत जोर से सिसकारियां ले रही थी लेकिन मुझे एहसास हो चुका था मेरा वीर्य पतन होने वाला है और जल्द ही मेरा वीर्य पतन हो गया। जैसे ही मेरा वीर्य गिराने को था तो मैने अपने लंड को उनकी चूत से बाहर निकाल दिया था उसकी चूत से अभी भी खून बहार निकाल रहा था। थोड़ी देर तक तो हम दोनों ने एक दूसरे से बातें की लेकिन फिर दोबारा से मेरा लंड खड़ा होने लगा था और मैं उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डालना चाहता था। मैंने उसकी चूत मे लंड को घुसा दिया था।

मैं उसके स्तनो को दबाने लगा था। मैं जब शिप्रा की चूत में लंड घुसा रहा था तो वह बहुत जोर से सिसकारियां लेती और मुझे अपने पैरों के बीच मे जकडने की कोशिश कर रही थी। जब वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकडने की कोशिश करने लगी तो मैंने भी शिप्रा से कहा मैं तुम्हारी योनि में अपने माल को गिराना चाहता हूं और मैंने उसकी चूत में अपने माल को गिरा दिया। जब शिप्रा की चूत में मेरा माल गिरा तो वह खुश हो गई और मुझे बोली मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है जिस तरीके से तुमने मेरा साथ दिया है और मेरी इच्छा को पूरा किया है।


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