आशा की चूत को चाटा

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Antarvasna, desi kahani:

Asha ki chut ko chata मैं पुणे में जॉब करता हूं और काफी समय हो गया था मैं पापा मम्मी से भी नहीं मिल पाया था। पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी पेशा है इसलिए वह लोग मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हैं लेकिन मैं चाहता था कि मैं उन लोगों से कुछ दिनों के लिए मिलने के लिए जाऊं। मैंने कुछ दिनों की अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और मैं उनसे मिलने के लिए मुंबई चला गया। मुझे पुणे में एक वर्ष हो चुका है और मैं कभी कभार पापा मम्मी से मिलने के लिए चले जाया करता हूं।

हालांकि उन लोगों के पास भी समय कम ही होता है लेकिन जब मैंने ऑफिस से छुट्टी ली थी उस वक्त उन लोगो की भी छुट्टी थी इसलिए मैं उन लोगों के साथ में अच्छा समय बिता पाया। जब मैं घर पर ही था तो उन्होंने मुझे कहा कि रमन बेटा तुम मुंबई में ही जॉब क्यों नहीं कर लेते मैंने पापा से कहा कि पापा कुछ समय के बाद मैं मुंबई में ही जॉब कर लूंगा। मैं ज्यादा दिन तक घर पर तो नहीं रहा लेकिन मुझे काफी अच्छा लगा जब मैंने पापा और मम्मी के साथ में समय बिताया।

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मैं वापस लौट चुका था और मैं अपनी जॉब पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था मेरी जिंदगी में कुछ भी नया नहीं था मैं सुबह के वक्त ऑफिस जाता और शाम को घर लौट आता था। एक दिन मेरे दोस्त ने अपने घर पर एक पार्टी रखी थी उसने मुझे उस पार्टी में इनवाइट किया तो मैं भी उस दिन शाम के वक्त पार्टी में चला गया। जब मैं पार्टी में गया तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि मैं अधिकतर लोगों को वहां पर नहीं पहचानता था वहां पर कुछ गिने-चुने लोग ही तो थे लेकिन फिर भी मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। उसी पार्टी के दौरान मेरे दोस्त ने मुझे आशा से मिलवाया तो आशा से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा था।

आशा के साथ मैं बातें भी करने लगा था और आशा भी वहां पर किसी को नहीं जानती थी इसलिए वह मेरे साथ ही बातें कर रही थी। वह सिर्फ रोहित को ही जानती थी और मैं भी रोहित को ही जानता था। एक तरीके से रोहित हम दोनों का कॉमन फ्रेंड था और उसने और मैंने साथ में काफी अच्छा समय बिताया। मुझे आशा के साथ में समय बिता कर बहुत ही अच्छा लगा उसके बाद मैं वापस घर लौट आया और आशा से मेरी बात होती रही  मैं आशा से फोन पर बातें करने लगा था और हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें करते तो हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगता।

हम बहुत ही खुश थे मुझे नहीं मालूम था कि आशा और मेरे बीच में जल्द ही प्यार हो जाएगा और हम दोनों एक दूसरे के बिना रह भी नहीं पाएंगे। मैंने हीं आशा को प्रपोज किया था और मैंने उसकी आंखों में प्यार की खुशी देखी। हम दोनों का रिलेशन बढ़िया से चल रहा था और हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे हमारी जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा था मैं आशा के साथ काफी खुश था। एक दिन हम दोनों साथ में समय बिता रहे थे उस दिन हम दोनों कॉफी शॉप में बैठे हुए थे जब मैंने आशा को कहा कि मुझे आज तुम्हारे साथ बहुत ही अच्छा लग रहा है तो आशा ने मुझे कहा कि चलो आज हम लोग मूवी देख आते हैं।

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उस दिन हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए और हम दोनों साथ में ही बैठकर मूवी देख रहे थे हम बहुत ही ज्यादा खुश थे। जब मूवी खत्म हुई तो उसके बाद मैंने आशा को उसके घर छोड़ दिया और आशा के घर चले जाने के बाद मैं भी अपने घर लौट आया था। उस दिन मुझे पापा का फोन आया और पापा ने मुझसे उस दिन काफी देर तक बात की। अगले दिन मुझे ऑफिस के लिए जल्दी निकलना था इसलिए मैं ऑफिस के लिए जल्दी तैयार हुआ और ऑफिस के लिए चला गया। मैं ऑफिस पहुंचा ही था कि मुझे आशा का फोन आया जब मैं ऑफिस पहुंचा तो आशा ने मुझे कहा कि आज मैं घर पर ही हूं मैंने आशा को कहा कि मैं तुमसे शाम के वक्त ही मिल पाऊंगा।

आशा ने कहा ठीक है तुम मुझसे शाम के वक्त मिलना और हम लोगों ने शाम के वक्त मिलने का फैसला कर लिया था। जब हम दोनों शाम के वक्त मिले तो हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा टाइम स्पेंट किया और हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस तरीके से हम दोनों साथ में टाइम स्पेंड कर रहे थे। जब भी मैं आशा के साथ होता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और आशा को भी बड़ा अच्छा लगता जब भी हम दोनों साथ में होते हैं। हम दोनों का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा था मुझे कुछ दिनों के लिए मुंबई जाना था मैंने जब आशा को यह बात बताई तो आशा ने मुझे कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ मुंबई आना चाहती हूं।

मैंने आशा को कहा कि ठीक है तुम भी मेरे साथ मुंबई चलो और उस वक्त मैं आशा को अपने साथ मुंबई ले गया मैं चाहता था कि आशा को मैं अपनी फैमिली से मिलवाऊं। मैंने आशा को अपनी फैमिली से मिलवाया आशा हमारे घर पर ही रुकी थी पापा मम्मी को भी इस बात से कोई ऐतराज नहीं था वह लोग आशा से मिलकर बड़े खुश थे। मुझे भी बहुत अच्छा लगा था जब  मैंने पापा और मम्मी को आशा से मिलवाया था। आशा को सब लोग अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर चुके थे और मैं भी बहुत खुश था कुछ ही दिन में हम दोनों पुणे लौट आए थे। पुणे लौटने के बाद आशा और मेरी मुलाकात होती ही रहती थी और हम दोनों साथ में काफी अच्छा टाइम बिताया करते है।

एक दिन आशा मुझसे मिलने के लिए फ्लैट में आई हुई थी। उस दिन वह मुझसे मिलने के लिए आई हुई थी। हम दोनों साथ में बैठकर बातें कर रहे थे मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे। हम दोनों की गर्मी इतनी बढ़ चुकी थी हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पाए और मैं आशा की जांघ को दबाने लगा। मैं उसकी जांघ को दबा रहा था तो मेरी गर्मी बढ़ती जा रही थी और आशा की गर्मी भी बढ़ रही थी। हम दोनों पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा मैंने आशा के नरम होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। जब मैं उसके होठों को चूम रहा था तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और आशा को भी बहुत मजा आ रहा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूम कर अपनी गर्मी को बढ़ा रहे थे।

अब आशा पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी मैंने उससे कहा मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूं। वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुकी थी। आशा ने मेरी गर्मी को बढ़ा दिया था हम दोनों पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे। हमारी गर्मी बहुत अधिक हो चुकी थी हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पाए रहे थे। मैंने जैसे ही अपने लंड नाम को बाहर निकाला तो आशा ने उसे अपने हाथों में ले लिया और वह उसे अपने मुंह में लेकर सकिंग करने लगी जिस तरीके से वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी उससे मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और आशा को भी मजा आ रहा था।

मेरे लंड को वह संकिग कर रही थी दोनों की गर्मी बढ़ चुकी थी। मैंने उसको कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं आशा ने मुझे कहा मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी है और आशा की गर्मी इतनी बढ़ चुकी थी मैंने आशा के कपड़े उतारकर उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो वह गरम हो गई मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे का साथ दे रहे थे। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे और हमारी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी।

मैंने आशा से कहा मैं तुम्हारी चूत में लंड डालना चाहता हूं। मैंने आशा की चूत को चाटना शुरू किया मैं उसकी योनि को चाटने लगा था। मुझे समझ आने लगा वह पूरी तरीके से गर्म होती जा रही थी वह इतनी ज्यादा गरम हो गई थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने उसकी चूत मे लंड डाल दिया उसकी योनि के अंदर मेरा लंड जाते ही वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी आशा की योनि से खून निकल आया था। आशा की चूत से खून निकलते देख मै उसे और भी तेजी से धक्के देने लगा था वह बड़ी खुश हो गई थी जिस तरीके से मैं उसे धक्के मार रहा था।

मैंने आशा को बहुत देर तक चोदा। हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छे से देने लगे थे हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा दिया था मेरा लंड आशा की चूत के अंदर बाहर हो रहा था। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था तो मुझे मजा आने लगा था और आशा को भी मजा आने लगा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ में सेक्स कर रहे थे।

अब हम अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रहे थे ना तो मैं अपने आप को रोक पा रहा था ना ही आशा अपने आप को रोक पा रही थी क्योंकि आशा की चूत से निकलता हुआ खून बहुत ज्यादा बढ़ चुका था और वह मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा चुका था। मैंने आशा को कहा मैं तुम्हारी चूत में अब अपने माल को गिराना चाहता हूं मैंने अपने वीर्य को आशा की योनि में गिरा दिया मेरा माल उसकी चूत में गिर चुका था मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो चुका था जिस तरीके से उस दिन के बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ अक्सर सेक्स करने लगे थे।


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