वह गर्म होने लगी थी

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Kamukta, antarvasna:

Wah garm hone lagi thi मेरे कॉलेज का पहला दिन था और जब मैं अपनी क्लास में था तो उस दिन मेरा सब लोगों से परिचय हुआ और मुझे काफी अच्छा लगा जिस तरीके से पहले दिन मेरा परिचय सब लोगों से हुआ। उसके बाद तो मैं सब लोगों से मिलने लगा था मेरी दोस्ती सुभाष के साथ हो गई थी सुभाष मेरे क्लास में ही पड़ता है और मुझे सुभाष के साथ हमेशा ही अच्छा लगता। महिमा भी हमारे क्लास में पढ़ती है लेकिन महिमा से मेरी बहुत ही कम बातें हुआ करती थी परंतु अब समय के साथ साथ महिमा और मैं एक दूसरे से काफी ज्यादा बातें करने लगे थे। मुझे महिमा का साथ बहुत ही अच्छा लगता और महिमा को भी मेरा साथ बहुत ही अच्छा लगता था। जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ में समय बिताया करते उससे हम दोनों को ही बड़ा अच्छा लगता था और मैं बहुत ज्यादा खुश रहता जब भी मैं और महिमा साथ में होते। एक दिन मैं और महिमा साथ में थे उस दिन हम दोनों हमारी कॉलेज की कैंटीन में बैठे हुए थे मैं महिमा से बातें कर रहा था कि तभी सुभाष दौड़ता हुआ आया और वह कहने लगा कि सोहन तुम मेरे साथ अभी चल सकते हो।

मैंने उसे कहा कि लेकिन अभी चलना कहां है तो वह मुझे कहने लगा कि तुम मेरे साथ अभी घर पर चलो तो मैंने उसे कहा कि लेकिन घर पर क्या काम है तो उसने मुझे कहा सोहन तुम घर पर चलो तो सही और वह मुझे अपने साथ घर पर ले आया। जब वह मुझे अपने साथ घर पर लाया तो मैंने उसे कहा कि तुमने मुझे बताया नहीं कि घर पर क्या काम था तो वह मुझे कहने लगा कि मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहता हूं। उस दिन सुभाष ने मुझे अपनी मोटरसाइकिल दिखाई जो उसके पापा ने उसे गिफ्ट की थी और वह बहुत ही ज्यादा खुश था। हम लोग क्लास भी नहीं पढ़ पाए थे और हम लोग घर आ गए थे इसलिए मैं उस दिन घर जल्दी चला आया। जब शाम के वक्त मेरी बात महिमा से हुई तो उसने मुझसे पूछा कि तुम्हें सुभाष कहां लेकर गया था। मैंने उसे सारी बात बताई और कहा कि सुभाष के पापा ने उसे कुछ दिनों पहले ही एक मोटरसाइकिल गिफ्ट की थी जिस वजह से वह बहुत ही ज्यादा खुश है और वह मुझे अपनी मोटरसाइकिल दिखाने भी ले गया था। मैं महिमा के साथ फोन पर बातें कर रहा था और मुझे उससे बातें करना अच्छा लग रहा था। जब मैं महिमा के साथ में बातें कर रहा था तो मुझे मालूम ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गई और मैं सो गया था।

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जब मेरी आंख खुली तो उस वक्त रात के 12:00 बज रहे थे इसलिए मैंने सोचा की महिमा से फोन पर बातें करना ठीक नहीं रहेगा। मैंने अगले दिन सुबह जब महिमा से फोन पर बातें की तो मैं महिमा से बात कर के बहुत ज्यादा खुश था और उससे मैं जब बातें कर रहा था तो वह मुझे कहने लगी कि सोहन आज तुम क्या कर रहे हो। उस दिन हमारे कॉलेज की छुट्टी थी। मैंने महिमा से कहा मैं तो आज घर पर ही हूं तो महिमा मुझे कहने लगी कि क्या आज हम लोग मूवी देखने के लिए चल सकते हैं तो मैंने उसे कहा की हां क्यों नहीं।

मैं भी घर पर अकेला बोर हो रहा था तो सोचा की महिमा के साथ मूवी देखने के लिए चले जाता हूं। उस दिन जब मैं महिमा के साथ मूवी देखने के लिए गया तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था। मैं और महिमा साथ में थे हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा टाइम स्पेंड किया। उस दिन मैं बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से मैंने उस दिन महिमा के साथ में टाइम स्पेंड किया था। अब हम दोनों एक दूसरे के बहुत ज्यादा करीब आते जा रहे थे। मेरा और महिमा का रिलेशन भी चलने लगा था मैं और महिमा एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करने लगे थे। समय के साथ साथ हम दोनों के रिलेशन को काफी समय हो चुका था। अब हम दोनों के ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद एक दिन मैंने महिमा से कहा कि महिमा मैं अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए पुणे जा रहा हूं।

महिमा इस बात से गुस्सा हो गई और वह मुझे कहने लगी कि सोहन क्या तुम यही पढ़ाई नहीं कर सकते हो तो मैंने उससे कहा कि तुम तो जानती ही हो कि मुझे एमबीए की पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ेगा। महिमा को मैंने किसी तरीके से समझा दिया था और उसके बाद मैं पुणे में ही रहने लगा था। पुणे में मैं हॉस्टल में रहता हूं और मैं अपनी पढ़ाई पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था। महिमा से मेरी बात सिर्फ फोन पर ही होती थी। जब हम दोनों की बातें होती तो हम दोनों को ही बहुत ज्यादा अच्छा लगता था। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर के बहुत खुश होते और मैं जब भी महिमा के साथ बातें किया करता तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता।

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काफी दिन हो चुके थे मैं महिमा से मिला नहीं था और अपने घर भी नहीं जा पाया था तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं कुछ दिनों के लिए घर हो आऊं। वैसे भी हम लोगों की जल्द ही कॉलेज की छुट्टियां पढ़ने वाली थी इसलिए मैं अपने घर नागपुर लौटना चाहता था और मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर नागपुर चला आया। जब मैं अपने घर आया तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगा और अपनी फैमिली के साथ भी मैंने अच्छा टाइम स्पेंड किया। घर पर मुझे महिमा भी मिली महिमा से मिलकर मैं बड़ा खुश हुआ और महिमा भी मुझसे मिलकर बहुत ही ज्यादा खुश थी। जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे से मुलाकात की उससे हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगा और काफी लंबे समय के बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिता पा रहे थे।

मैं और महिमा एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे हम दोनों ने एक दूसरे के साथ में काफी अच्छा समय बिताया। मुझे काफी अच्छा भी लग रहा था जिस तरीके से मैंने और महिमा ने एक दूसरे के साथ में अच्छा टाइम स्पेंट किया। क्योंकि मैं कुछ दिनों तक घर पर ही रहने वाला था इसलिए मैं और महिमा एक दूसरे को मिलते ही रहते थे। जब उस दिन हम दोनों एक दूसरे को मिले मैंने महिमा से कहा महिमा काफी दिन हो गए हैं हम दोनों ने एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध नहीं बनाए हैं। हम दोनों के बीच इससे पहले भी सेक्स संबंध बन चुके थे और काफी दिन हो चुके थे महिमा और मैंने एक दूसरे के साथ सेक्स नहीं किया था। महिमा मेरी बात मान गई उस दिन हम दोनों ने साथ में रुकने का फैसला कर लिया था। मैंने अपने दोस्त को फोन किया क्योंकि उसके घर पर कोई भी नहीं था इसलिए मैं उस रात महिमा के साथ अपने दोस्त के घर पर ही रुकने वाला था महिमा के साथ मैं काफी लंबे समय बाद सेक्स करने जा रहा था मुझे इस बात की बड़ी खुशी थी और महिमा भी बहुत ज्यादा खुश थी।

जब हम दोनों रूम में एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे तो मैंने महिमा को अपनी बाहों में ले लिया जब महिमा मेरी गोद में आकर बैठी तो मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा था महिमा भी बहुत ज्यादा खुश थी जिस तरीके से मैं और महिमा एक दूसरे के साथ में सेक्स करने के लिए तैयार थे। मैंने जैसे ही महिमा के सामने अपने लंड को किया महिमा बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी मैंने महिमा से कहा तुम मेरे लंड को चूसती रहो। महिमा ने तुरंत ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया वह उसे सकिंग करने लगी थी।

वह जब मेरे लंड को चूसती तो मुझे मजा आने लगा था और महिमा को भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ में सेक्स का मजा ले रहे थे। उससे हम दोनों को बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था अब हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे मैंने अपने होठों को महिमा के होठों से टच किया जिसके बाद हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे थे। महिमा भी गर्म होने लगी थी महिमा ने अपने बदन से पूरे कपड़े उतार दिए जब उसने अपने बदन से कपडो को उतारा तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था और महिमा को भी बड़ा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे का साथ दे रहे थे। हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मेरा लंड महिमा की योनि में जाने के लिए तैयार हो चुका था।

जब मैंने महिमा की चूत पर लंड को रगड़ना शुरू किया तो वह गर्म होने लगी थी मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं और महिमा एक दूसरे का साथ दे रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था जब हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे तो मैंने महिमा की योनि पर अपने लंड को लगा दिया और जैसे ही मैंने महिमा की चूत पर लंड को लगाया तो मैंने अपने मोटे लंड को महिमा की योनि में प्रवेश करवाया। वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगने लगा है। हम दोनों को पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे जिस तरीके से हम दोनों गर्म होने लगे थे उससे हम दोनों को ही मजा आने लगा था और हम दोनों बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगे थे।

मैं और  महिमा बहुत ज्यादा गरम हो चुके थे मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर घुसा दिया और जैसे ही मेरा लंड महिमा की योनि में घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी उसने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया था जिससे कि मेरा लंड आसानी से उसकी योनि में प्रवेश पा रहा था और मैं उसे बड़ी ही तेजी से चोदे जा रहा था। हम दोनो को मजा आने लगा था मैं उसे जिस तेज गति से चोद रहा था उससे उसको मजा आने लगा था और वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। हम दोनों पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे अब हमारी गर्मी इतनी ज्यादा बढने लगी थी हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे। मैं महिमा को बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था महिमा को बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था जब वह मेरा साथ दे रही थी। हम दोनों ने एक दूसरे का साथ बहुत ही अच्छे से दिया। अब मुझे समझ आ चुका था मैं और महिमा एक दूसरे के साथ में ज्यादा देर तक सेक्स नहीं कर पाएंगे इसलिए मैंने भी अपने वीर्य को महिमा की चूत मे गिरा दिया।


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