हम दोनों ही गर्म होते चले गए

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Antarvasna, hindi sex stories:

Hum dono hi garm hote chale gaye मैं अपनी घड़ी में समय देख रहा था उस वक्त 9:00 रहे थे मैं अभी भी बस स्टॉप पर खड़ा था और बस का मैं इंतजार कर रहा था लेकिन अभी तक मुझे बस आती हुई नजर नहीं आई थी। मेरे पास में ही खड़े एक बुजुर्ग व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि बेटा टाइम कितना हुआ है तो मैंने उन्हें बताया कि 9:05 हो चुके हैं तो वह मुझे कहने लगे कि बस आज भी लेट है। मैंने उन्हें कहा कि क्या आप हर रोज यहां से जाते है तो वह मुझे कहने लगे कि हां मैं हर रोज यहां से जाता हूं। उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा तुम कहां रहते हो तो मैंने उन्हें बताया कि मैं यहीं पास में रहता हूं। वह मेरे बारे में पूछने लगे और मैंने उन्हें अपने बारे में सब कुछ बता दिया लेकिन अभी भी बस नहीं आई थी। मुझे अपने ऑफिस के लिए देर हो रही थी तो उन बुजुर्ग ने मुझसे कहा कि बेटा मुझे लगता है कि आज बस नहीं आएगी। वह मुझे कहने लगे कि तुम्हें ऑफिस के लिए भी देर हो रही होगी तुम ऑटो पकड़ कर यहां से चले जाओ मैंने कहा कि नहीं थोड़ी देर और बस का इंतजार कर लेता हूं क्या पता बस आ जाए।

9:20 पर बस आ चुकी थी और बस के लिए सब लोग वहां पर काफी देर से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही बस आई तो बस में काफी ज्यादा लोग थे और बस पूरी भर चुकी थी। बस पूरी तरीके से भर चुकी थी और मैं भी बस में किसी तरीके से कोने में खड़ा हो गया था। जब मेरे पास कंडक्टर किराया लेने के लिए आए तो मैंने उन्हें पैसे दिया। मुझे बहुत ही मुश्किल हुई है अपनी जेब से पैसे निकालने में लेकिन किसी प्रकार से मैंने उन्हें पैसे दिए और मैं अपने ऑफिस 10:00 बजे तक पहुंच चुका था। हालांकि मुझे ऑफिस पहुंचने में लेट तो नहीं हुई थी लेकिन फिर भी उस दिन हमारे ऑफिस में बहुत जरूरी मीटिंग थी और मुझे वह मीटिंग अटेंड करनी थी। कुछ ही देर बाद मैं अपने ऑफिस पहुंच चुका था और उसके बाद मैं अपने काम पर ध्यान देने लगा। दोपहर के वक्त मीटिंग होनी थी और उस मीटिंग में सब लोग थे।

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वहां पर जब मीटिंग खत्म हुई तो उसके बाद मैं अपनी जगह पर बैठा हुआ था और मेरे बगल में ही रौनक बैठा हुआ था रौनक भी मुझसे बात कर रहा था  हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे तो रौनक ने मुझे बताया कि उसके परिवार वालों ने उसके लिए लड़की देख ली है और अब जल्दी ही उसकी सगाई हो जाएगी। मैंने रौनक को इस बात की बधाई दी और कहा कि चलो यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि अब तुम्हारी सगाई हो जाएगी। रौनक और मैं एक दूसरे के साथ बातें कर रहे थे। शाम के वक्त मैं अपना काम खत्म कर के अपने घर पर लौट आया था मैं अकेला ही रहता हूं। मैं चंडीगढ़ का रहने वाला हूं और कुछ समय पहले ही मैं मुंबई में जॉब करने के लिए आया था। मैं अपने घरवालों को बहुत ज्यादा मिस कर रहा था काफी दिन हो गए थे मैं अपने परिवार से मिला भी तो नहीं था मैं सोचने लगा कि कुछ दिनों के लिए मैं अपने घर चला जाऊं। मुझे करीब 3 महीने हो चुके थे और मैं तीन महीनों से अपने घर नहीं गया था।

मैंने उस दिन अपने पापा को फोन किया और उनसे काफी देर तक मैंने फोन पर बातें की। मुझे पापा से बात करके अच्छा लग रहा था और उनसे मैंने काफी देर तक बातें की थी उसके बाद मैंने खाना बाहर से ही ऑर्डर करवा दिया था। जैसे ही खाना आया तो मैं अब खाना खाने लगा और खाना खाने के बाद मैं लेट चुका था उसके बाद मुझे नींद भी आ गई। अगले दिन जब मैं सुबह उठा तो मुझे फिर ऑफिस के लिए निकलना था और जल्दी से तैयार होकर मैं अब ऑफिस के लिए निकल चुका था। मैं जैसे ही ऑफिस पहुंचा तो उस दिन भी ऑफिस में काफी ज्यादा काम था और मुझे घर लौटने में देरी हो गई। मुझे काफी दिन हो गए थे मैं चंडीगढ़ नहीं गया था और अब मैं सोचने लगा था कि कुछ दिनों के लिए मैं छुट्टी ले ही लूं। मैंने अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले ली और मैं जल्द ही घर चला गया। जब मैं चंडीगढ़ गया तो पापा और मम्मी बड़े ही खुश थे और भैया भी बहुत ज्यादा खुश थे। भैया ने मुझे कहा कि सोहन तुम कितने दिनों बाद घर आ रहे हो। सब लोग घर में बहुत ज्यादा खुश थे और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं अपने घर पर समय बिता पा रहा था। पापा मम्मी के साथ में मैंने काफी अच्छा समय बिताया और मुझे मालूम ही नहीं चला कि कब मेरी छुट्टी खत्म हो गई। 10 दिन बीतने के बाद मैं वापस लौट आया था और मैं अपनी जॉब पर जाने लगा था।

मेरी लाइफ में कुछ भी ऐसा नहीं था जिससे कि मुझे खुश होने का मौका मिले मैं सुबह के वक्त ऑफिस जाता और शाम को घर लौट आता। मेरे कुछ गिने चुने ही दोस्त है जिनके साथ मैं थोड़ा समय ऑफिस के वक्त बिता लिया करता था लेकिन मैं अपने दोस्तों को बड़ा मिस कर रहा था। मैं अपने कॉलेज के फ्रेंड हो बहुत ही ज्यादा मिस करता था लेकिन उन लोगों से सिर्फ मेरी फोन पर ही बातें हो सकती थी और मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं उन लोगों से फोन पर बातें कर लिया करता था। मुझे उन लोगों से फोन पर बातें करना बड़ा ही अच्छा लगता जब भी मैं अपने कुछ पुराने दोस्तों से फोन पर बातें किया करता था। मेरी जिंदगी बिल्कुल ही सामान्य तरीके से चल रही थी और मेरी जिंदगी में कुछ भी नया नहीं था। लेकिन शायद अब मेरी जिंदगी में काफी बदलाव आने लगा था क्योंकि मेरे बिल्कुल सामने वाली फ्लैट मे रचना रहने के लिए आ गई थी। रचना वहां रहने के लिए आई तो मुझे भी रचना से दोस्ती करने का मौका मिला और हम दोनों की दोस्ती गहरी होती चली गई। रचना के बिना मेरा जीवन जैसे अधूरा सा लगने लगा था और उस से जब भी मै बात नहीं करता या फिर मुलाकात नहीं करता तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था और बिल्कुल ऐसा ही हाल रचना का भी था वह भी मुझसे नहीं मिलती तो उसे भी अच्छा नहीं लगता था।

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कहीं ना कहीं हम दोनों एक दूसरे को प्यार भी करने लगे थे यही वजह थी मैं रचना के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाता था और ना ही वह मेरे बिना रह पाती थी इसलिए हम दोनों साथ में समय बिताने की कोशिश किया करते और हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता था। एक दिन मै और रचना साथ में थे हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था रचना मेरे फ्लैट में आई हुई थी।

हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैं बार-बार रचना की जांघों को देख रहा था जैसे ही मैंने अपने हाथ को रचना की जांघ पर रखा तो उसने मुझे कुछ नहीं कहा वह गर्म होती चली गई। वह इतनी ज्यादा गरम हो गई थी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा और रचना को भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी और हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे। अब हम दोनों की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी थी हम दोनों पूरी तरीके से गर्म हो गए थे। मैंने रचना के होंठों को चूमना शुरू कर दिया था वह इस कदर गर्म हो गई थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था ना ही रचना अपने आप पर काबू कर पा रही थी। हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी मैंने जब रचना के बदन से कपड़े खोलो तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं उसके स्तनों को दबाने लगा था। उसके गोरे बदन को देख मेरा लंड और भी ज्यादा तन कर खड़ा होने लगा था मैं गर्म होता जा रहा था।

हम दोनों ही गर्म होते चले गए मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ चुकी थी। रचना भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था जब मैं और रचना एक दूसरे का साथ दे रहे थे। मैंने रचना की पैंटी को नीचे उतारते हुए जब उसकी चूत पर अपनी उंगली को लगाया तो उसकी योनि से पानी बहुत अधिक मात्रा मे गिरने लगा था। मुझे  बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं और रचना एक दूसरे का साथ दे रहे थे। हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और हम दोनों को मजा आने लगा था जब हम दोनों एक दूसरे का साथ दे रहे थे और एक दूसरे की गर्मी को बढ़ने लगे थे। मैंने रचना की योनि के अंदर अपने लंड को घुसाने का फैसला कर लिया था जब उसकी चिकनी चूत के अंदर मैंने अपने लंड को डाला तो वह खुश हो गई। वह मुझे बोली मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है अब रचना और मैं एक दूसरे का साथ अच्छे से देने लगे थे मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी।

जिस तरीके से मै और रचना एक दूसरे का साथ दे रहे थे उससे हम दोनों ही बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। मैं बहुत ज्यादा गरम होने लगा था मैं जिस तरीके से उसे चोद रहा था उससे उसकी सिसकारियां भी बढ़ रही थी और वह मेरी गर्मी को भी बढाए जा रही थी। रचना ने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था जब मुझे लगने लगा वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ने की कोशिश कर रही है तो मुझे उसकी चूत और भी ज्यादा टाइट महसूस होने लगी थी। रचना की चूत से खून भी निकलने लगा था जिससे कि मुझे अब और भी ज्यादा मजा आ रहा था और मैं उसकी योनि में अपनी माल को गिरना चाहता था। मैंने जैसे ही अपने वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में गिराई तो मुझे मजा आ गया था।


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