मेरी गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगी

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Antarvasna, hindi sex story:

Meri garmi aur bhi jyada badhne lagi मुझे ऑफिस जाने के लिए देर हो रही थी मैं जल्दी से तैयार हुआ और अपने ऑफिस के लिए निकल गया। हालांकि ऑफिस पहुंचते पहुंचते भी मुझे बहुत ज्यादा देर हो चुकी थी। मैं जब ऑफिस में पहुंचा तो उस दिन मुझे मेरी पत्नी का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि राजेश जब आप घर आएंगे तो आप मां की दवाइयां लेते हुए आ जाना। मैंने अपनी पत्नी से कहा ठीक है मैं मां के लिए दवाइयां ले आऊंगा। मैं अपना काम खत्म कर के शाम के वक्त जब घर लौटा तो मुझे यह बात ध्यान में नहीं थी कि मुझे मां के लिए दवाई लेकर जानी थी लेकिन रास्ते में मुझे यह बात ध्यान आई तो मुझे वापस से मेडिकल शॉप में जाना पड़ा और वहां से मैंने दवाई ले ली। मैं दवाई लेकर घर पहुंचा तो उस दिन मुझे घर पहुंचने में काफी ज्यादा देर हो गई थी मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही थी और वह मुझे कहने लगी कि राजेश आज आपने ऑफिस से आने में काफी देर लगा दी।

मैंने उसे बताया कि आज ऑफिस में काफी ज्यादा काम था फिर मुझे रास्ते से दवाई भी लेनी थी और रास्ते में बहुत ज्यादा ट्रैफिक था इसलिए मुझे घर पहुंचने में देरी हो गई। वह मुझे कहने लगी कि आप खाना खा लीजिए मैं आपके लिए खाना लगा देती हूँ। मां सो चुकी थी और पापा अभी उठे हुए थे तो मैंने कुछ देर पापा से बात की और उसके बाद मैंने और मेरी पत्नी ने डिनर किया। पापा और मां पहले ही खाना खा चुके थे हम दोनों डिनर करने के बाद कुछ देर छत पर टहलने के लिए चले गए। हम लोग छत पर टहल रहे थे तो मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि मैं कल अपने मायके जाने के बारे में सोच रही हूं। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि ठीक है अगर तुम मायके जा रही हो तो तुम चली जाओ। वह अब अपने मायके जाने की तैयारी करने लगी थी अगले दिन सुबह जब वह सामान पैक कर रही थी तो उसने मुझे कहा कि क्या आप मुझे भी छोड़ देंगे। मैंने लता से कहा कि हां क्यों नहीं मैं तुम्हें भी छोड़ देता हूं।

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मैं जब ऑफिस के लिए निकल रहा था तो मैंने लता को उसके पापा मम्मी के घर पर छोड़ दिया था और फिर मैं वहां से अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा। मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो मुझे उस दिन बहुत ही ज्यादा काम था और जब शाम के वक्त मैं घर लौटा तो मैं बहुत ज्यादा थका हुआ था। मुझे काफी ज्यादा गहरी नींद भी आ रही थी इसलिए मैं उस दिन जल्दी ही सो चुका था मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी आंख लग गई और मैं सो गया। अगले दिन जब सुबह मैं उठा तो मैं अपने ऑफिस के लिए जल्दी से निकला और उस दिन ऑफिस में मेरे दोस्त ने मुझे अपने बर्थडे पार्टी में इनवाइट किया था। उसने मुझे अपनी पार्टी में इनवाइट किया था और दो दिन बाद मुझे उसकी पार्टी में जाना था तब तक लता भी अपने मायके से लौट चुकी थी। वह जब घर आई तो मैंने उसे कहा कि हम लोगों को मेरे दोस्त की बर्थडे पार्टी में जाना है। लता और मैं उस दिन राजीव की बर्थडे पार्टी में गए और हम लोगों को वहां से घर लौटने में काफी ज्यादा देर हो चुकी थी लेकिन मुझे काफी अच्छा लगा था जिस तरीके से मैंने और मेरी पत्नी ने साथ में समय बिताया था।

लता के साथ काफी समय से मैं कहीं घूमने के लिए भी नहीं गया था तो मुझे लग रहा था कि मुझे लता के साथ कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए। मैंने उस दिन लता से बात की और कहा कि क्या हम लोगों को कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए तो लता ने कहा कि हां क्यों नहीं। हम लोगों ने जयपुर जाने का फैसला किया हम लोग कुछ दिनों के लिए जयपुर जाना चाहते थे क्योंकि लता की बड़ी बहन भी जयपुर में ही रहती हैं और इस बहाने हम लोगो की उनसे भी मुलाकात हो गयी थी और वहां पर घूमना भी हो गया। हम लोग जयपुर चले गए हम लोग जयपुर में काफी समय तक रहे उसके बाद हम लोग वहां से वापस लौट चुके थे। हम लोगों ने जयपुर में काफी ज्यादा इंजॉय किया और हम लोगों को बहुत अच्छा लगा जिस तरीके से हम लोगो ने जयपुर में समय बिताया था। जयपुर से वापस लौटने के बाद मैं अपने ऑफिस के काम में बिजी रहने लगा था इसलिए मैं लता को ज्यादा समय नहीं दे पाता था। लता को इस बात की बड़ी शिकायत रहती थी कि मैं उसे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता हूं लेकिन लता को यह बात अच्छे से मालूम थी कि मेरे पास बिल्कुल भी टाइम नहीं होता है वह मुझे समझती थी।

मुझे भी इस बात की बड़ी खुशी थी की लता मुझे समझती है कि मैं उसे क्यों समय नहीं दे पा रहा हूं लेकिन जब भी मुझे टाइम मिलता तो मैं लता को हमेशा अपने साथ कहीं ना कहीं लेकर जरूर जाता था और हम लोग साथ में काफी अच्छा समय बिताया करते थे। मेरे ऑफिस में मेरा प्रमोशन भी हो चुका था इसी वजह से काम की ज्यादा जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ चुकी थी और मैं काम को बखूबी निभाये जा रहा था। मैं अपने काम में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहने देता था मैं बड़ी ईमानदारी से अपना काम कर रहा था इसलिए मेरा प्रमोशन भी बहुत जल्दी हो गया था। मुझसे भी सीनियर मेरे ऑफिस में हैं उन लोगों का अभी तक प्रमोशन नहीं हुआ था। मेरे बॉस मेरे काम से बहुत ही ज्यादा खुश रहते हैं और वह हमेशा ही मुझे कहते हैं कि तुम बहुत ही अच्छे से अपने काम पर ध्यान देते हो और बड़ी जिम्मेदारी से अपने काम को निभाते हो। मैं अपने घर और अपने ऑफिस की जिम्मेदारी को बखूबी अच्छे से निभा रहा था और मेरी पत्नी लता का मुझे बड़ा ही सपोर्ट था।

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जिस तरीके से वह मेरा साथ देती और हमेशा ही मेरा वह बहुत ध्यान रखा करती है उससे मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। लता और मैं हमेशा ही एक दूसरे के साथ में होते थे। हम दोनों को अच्छा लगता था मुझे जब भी लता की जरूरत होती वह हमेशा ही मेरी जरूरतों को तुरंत पूरा कर दिया करती थी। मुझे जब भी सेक्स की जरूरत होती वह हमेशा ही मेरी जरूरतों को अच्छे से पूरा कर दिया करती थी। एक दिन मैं ऑफिस से आया उस दिन मेरा मन लता के साथ सेक्स करने का बहुत ज्यादा था। इस बात को वह अच्छे से जानती थी। मैंने जब लता को अपनी बाहों में कस कर पकडा तो वह मुझे कहने लगी आज आप बहुत ही ज्यादा रोमांटिक मूड मे नजर आ रहे हैं। वह इस बात से बड़ी खुश थी और मुझे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। मै लता के साथ में सेक्स के मज़े लेने वाला था। हम दोनो ने एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा दिया था हम दोनो रह नहीं पा रहे थे ना तो मैं अपने आप पर काबू कर पा रहा था और ना ही लता अपने आप पर काबू कर पा रही थी। मैं और लता एक दूसरे की गर्मी को बहुत ही ज्यादा बढ़ा चुके थे।

मैंने जब लता के सामने अपने मोटे लंड को किया तो वह मेरे लंड को अपने हाथों में लेने लगी और उसे हिलाने लगी। कुछ देर तक तो उसने मेरे लंड को हिलाया लेकिन फिर जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो अब लता को भी बड़ा मजा आने लगा था। जिस तरीके से वह मेरे मोटे लंड को सकिंग कर रही थी मेरी गर्मी बढ रही थी। मैंने लता के स्तनों को चूसना शुरू किया। जब मै उसके स्तनों को चूस रहा वह बहुत गर्म हो रही थी और मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा और लता की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढने लगी थी। मैं उसके निप्पल का रसपान कर रहा था। जब मैं उसके निप्पल को चूस रहा था मुझे मजा आता जा रहा था उसे बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे भी बहुत ही अच्छा  लग रहा था जब मैं और लता एक दूसरे का साथ दे रहे थे। हम दोनों को ही अच्छा लग रहा था अब मैं बिल्कुल भी रहा नहीं पा रहा था मैंने लता के दोनों पैरों को चौडा कर लिया था और अपनी उंगली को उसकी चूत मे घुसा दिया था वह उत्तेजित होने लगी थी और उसकी चूत की गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी।

मैंने अपने लंड को उसकी चूत मे घुसाने का फैसला कर लिया था जैसे ही मैंने उसकी चूत मे लंड को घुसाया तो उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था। लता और मैं एक दूसरे की गर्मी को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहे थे ना तो मैं अपने आपको रोक पा रहा था और ना ही लता। मैं उसे बड़ी ही तेज गति से धक्के दिया जा रहा था उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जिस तरीके से मैं उसकी चूत के मजे लेकर उसकी चूत की गर्मी को बढ़ाए जा रहा था। जब मैं और लता एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे तो वह बड़ी जोर से सिसकारियां ले रही थी और मुझे कहने लगी मेरी गर्मी को तुम बढ़ाते जाओ। मै उसकी चूत के अंदर बहार अपने लंड को किए जा रहा था और लता बहुत ही ज्यादा खुश हो रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है और मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। जब मेरा वीर्य मेरे अंडकोषो मे उतर चुका था तो मैने उसे और भी तेजी से चोदना शुरू किया।

वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ चुकी थी जिससे कि मेरी गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी और मेरे माल उसकी चूत मे गिरने को तैयार हो चुका था। वह बड़ी तेज आवाज में सिसकारियां ले रही थी मेरी गर्मी को बढाए जा रही थी। मैंने अब सोच लिया था मैं उसकी चूत में वीर्य की पिचकारी को जल्द से जल्द गिरा दूंगा मैंने ऐसा ही किया। जैसे ही मैंने उसकी योनि में अपने माल को गिराया तो वह बहुत खुश हो गई और मुझे बोली मुझे आज मजा आ गया है। मुझे भी बड़ा मजा आया जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के अंदर की गर्मी को बढ़ा दिया था। मैंने उसकी चूत का मजा लिया था मेरा वीर्य उसकी चूत मे गिरने के बाद हम दोनों एक दूसरे की बाहों में लेटे हुए थे और हम दोनो को बड़ा अच्छा लगा था जब हम दोनो एक दूसरे के साथ बातें कर रहे थे।


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