सुरभि मेरा साथ अच्छे से दे रही थी

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Antarvasna, hindi sex stories:

Surabhi mera sath achchhe se de rahi thi घर की आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी जिस वजह से मेरे मन मे हमेशा यही ख्याल आता कि मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कैसे करूंगा लेकिन मेरे चाचा जी ने मेरी मदद की और मैं अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर पाया। चाचा जी ने ही घर की देखभाल की अब मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई खत्म कर ली थी। मैं किसी तरीके से अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर पाया और अब मैं नौकरी की तलाश में था लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ती ही जा रही थी। मैं इस बात से बहुत ज्यादा परेशान होने लगा था मैं मानसिक रूप से भी तनाव में था लेकिन मां की उम्मीदे मुझसे काफी ज्यादा थी। मैंने  अब नौकरी करने का फैसला कर लिया था।

जब मेरी जॉब लगी तो मुझे काफी खुशी हुई मैं महीने के 25,000 तनख्वाह पर एक बड़ी कंपनी में लगा। मेरे लिए यह काफी खुशी की बात थी जब पहले महीने मुझे तनख्वाह मिली मैं बहुत ही ज्यादा खुश था। मेरी जिंदगी अच्छे से चलने लगी थी और मैं चाहता था मैं घर की जिम्मेदारी को बखूबी निभाऊ। मैं घर की जिम्मेदारी को बड़े ही अच्छे तरीके से निभाने लगा था। मां चाहती थी मेरी बड़ी बहन की शादी हो जाए इसलिए अब दीदी के लिए रिश्ते भी आने लगे थे। मैं भी चाहता था दीदी की शादी जल्द से जल्द हो जाए। जब दीदी की शादी हुई तो मैं काफी खुश था दीदी की शादी हो चुकी थी। कुछ दिनों तक मुझे और मां को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा लेकिन दीदी की शादी हो जाने के बाद मां को इस बात की खुशी थी कि दीदी की शादी अच्छे घर में हो गई है। मेरी जिंदगी भी अच्छे से चल रही थी मैं चाहता था अब हम लोग घर खरीद ले। जिस मकान मे हम लोग रहते हैं वह काफी पुराना भी हो चुका था और मैं चाहता था मैं नया घर खरीदूं लेकिन उसके लिए मुझे पैसों की जरूरत थी।

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मैं हर महीने अपनी तनख्वाह में से पैसे बचाने की कोशिश करने लगा और थोड़ी समय बाद मैंने अब घर खरीदने का फैसला कर लिया था। मैंने अब घर खरीद लिया जब मैंने नया घर खरीदा तो एक दिन मां और मैं साथ में बैठे हुए थे। मां मेरी तरक्की से काफी खुश थी मां ने मुझे कहा बेटा मैं चाहती हूं तुम शादी कर लो। मैंने मां से कहा नहीं मां अभी यह संभव नहीं हो पाएगा। मां को लगने लगा था मुझे शादी कर लेनी चाहिए मेरी उम्र भी हो चुकी थी परंतु मैं अभी शादी करने के लिए तैयार नहीं था। हमारी ऑफिस में सुरभि काम करती है वह मुझे काफी पसंद है लेकिन सुरभि से मेरी बात नहीं हो पाती है परंतु मैं उसे दिल ही दिल चाहता हूं। एक दिन सुरभि और मैं लंच टाइम में साथ में थे। उस दिन हम दोनों कि काफी बात हुई। यह पहली बार था जब मेरी और सुरभि की बातें हुई थी। हम दोनों ने एक दूसरे से इतनी बातें की जिससे कि मुझे काफी अच्छा लगा और उस दिन के बाद सुरभि से मैं बातें करने लगा था। मेरा काफी शर्मिला नेचर है जिस वजह से मुझे सुरभि से बात करने कि मेरी हिम्मत नहीं हो पाती थी लेकिन अब मैं सुरभि से बातें करने लगा था।

मुझे काफी अच्छा लगता जब मैं सुरभि से बातें किया करता। हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी खुश हैं। मैं और सुरभि एक दूसरे के साथ समय बिताने की कोशिश करते हैं और ऑफिस खत्म हो जाने के बाद मैं अक्सर सुरभि के साथ समय बिताने की कोशिश करता हूं। एक दिन हम लोगों ने मूवी देखने का फैसला किया है। यह पहली बार था जब मैंने सुरभि को कहा और वह मेरी बात मान गई। सुरभि और मैं मूवी देखने के लिए गए जब वह मेरे साथ मूवी देखने के लिए आई तो हम दोनों ने एक दूसरे के साथ काफी अच्छा समय बिताया। हम लोगों ने मूवी का भी इंजॉय किया अब हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे थे। मुझे लगा था मैं कभी भी सुरभि को अपने दिल की बात कह नहीं पाऊंगा लेकिन मैंने सुरभि से अपने दिल की बात कह दी थी। जब मैंने सुरभि से अपने दिल की बात कही तो मेरे लिए यह काफी अच्छा था। सुरभि मेरे प्यार को स्वीकार कर चुकी थी वह मेरे साथ रिलेशन में काफी खुश है हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं जिस तरीके से मैं और सुरभि एक दूसरे के साथ होते हैं उससे हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है।

मैं और सुरभि साथ में बैठे हुए बातें कर रहे थे उस दिन सुरभि ने मुझसे कहा आज मैं तुम्हें अपनी बहन से मिलवाती  हूं। सुरभि की छोटी बहन कॉलेज की पढ़ाई कर रही है क्योंकि उस दिन हम दोनों के ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए सुरभि ने मुझे अपनी बहन से मिलवाने की बात कही। जब सुरभि ने मुझे अपनी बहन नंदिता से मिलवाया तो मुझे नंदिता से मिलकर अच्छा लगा। सुरभि ने नंदिता को हम दोनों के रिलेशन के बारे में सब कुछ बता दिया था यह बात सिर्फ नंदिता को ही पता थी कि हम दोनों का रिलेशन चल रहा है। हम दोनों एक दूसरे के साथ खुश हैं और जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं उससे हमें अच्छा लगता है। मैं सुरभि को बहुत ही अच्छे से समझता हूं और सुरभि भी मुझे काफी अच्छे तरीके से समझती है। यही वजह है हम दोनों के बीच कभी भी झगड़े नहीं होते हैं और हम दोनों एक दूसरे के बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। मैं सुरभि को बहुत ज्यादा प्यार करता हूं और सुरभि भी मुझे बहुत ज्यादा प्यार करती है। सुरभि को मैंने अपनी मां से मिलवाया तो मां काफी खुश थी और वह हमारे घर पर अक्सर आया करती। जब भी सुरभि घर पर आती तो मां को काफी अच्छा लगता है और मैं भी काफी खुश हूं कि सुरभि और मैं एक दूसरे को अच्छी तरीके से समझते हैं। हम दोनों जब भी एक दूसरे के साथ होते हैं तो हमें काफी खुशी होती है।

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मेरा रिलेशन सुरभि के साथ बहुत ही अच्छे से चल रहा है और मैं चाहता हूं मैं सुरभि से शादी भी कर लूं लेकिन फिलहाल मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं था। हम दोनों अपने रिलेशन को बहुत ही अच्छे से चला रहे हैं और हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है जब भी मैं और सुरभि एक दूसरे के साथ समय बिताया करते हैं। सुरभि की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी इसलिए सुरभि घर पर ही थी। मैं सुरभि से मिलने के लिए उसके घर पर गया तो सुरभि ने मुझे कहा मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं। सुरभि कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आई जब वह ऑफिस आने लगी तो हम दोनों अब एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते। मेरा साथ सुरभि को हमेशा ही अच्छा लगता। एक दिन मैंने सुरभि को घर पर बुलाया। वह जब घर पर आई तो मैं और सुरभि एक दूसरे से बाते करते। हम दोनो हमेशा ही एक दूसरे के साथ जब भी होते तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। हम दोनो के बीच अक्सर किस हो जाया करता है। उस दिन जब हमारे बीच किस हुआ तो हम दोनो तडप रहे थे। मैंने सुरभि के रसीले होंठो को चूमा तो वह भी तडप रही थी।

उसकी चूत से पानी निकल रहा था। उसके गुलाबी होंठ चूमकर मेरी गर्मी बढ रही थी और मैं भी उसकी चूत के अंदर लंड को डालने के लिए बेताब था। वह मेरे लंड को अपने हाथो से दबा रही थी। जब वह ऐसा कर रही थी तो उसे मजा आ रहा था और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था। जब वह मेरे लंड को अपने हाथो से हिला रही थी और मेरी गर्मी को बढा रही थी। सुरभि ने मेरे लंड से पानी भी निकाल दिया था। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेना शुरु किया। जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मजा आ रहा था। उसने मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूसा। जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मजा आ रहा था। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया था और जब मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाकर चाटना शुरू किया तो उसे मजा आ रहा था। वह अपने पैरो को आपस मे मिला रही थी और मुझे मजा आ रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बढ रहा था। मैंने उसकी चूत के अंदर अब अपने लंड को लगाना शुरु कर दिया था। उसकी चूत पर मेरा मोटा लंड लगता उस से मेरी आग बढ रही थी। मैंने सुरभि की चूत के अंदर लंड को डालना शुरु किया। उसकी चूत को चिरता हुआ मेरा लंड अंदर जा चुका था। मैंने उसकी चूत पर तेजी से प्रहार करना शुरु कर दिया था। मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था।

वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी और मुझे मजा आ रहा था। जब वह मेरे लंड को अपनी चूत मे ले रही थी उस से मेरी आग बहुत बढ रही थी। मैंने उसके पैरो को खोलकर उसकी चूत पर तेजी से प्रहार कर रहा था। उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था। उसकी चूत के अंदर से निकलती हुई गर्मी बढ रही थी। उसकी चूत की गर्मी बहुत बढ चुकी थी। मैं अब उसकी चूत की गर्मी को झेल नहीं पा रहा था। मेरा माल उसकी चूत के अंदर सेट हो चुका था और जैसे ही मेरे वीर्य की बूंदे बाहर आई तो वह मुझे बोली मेरी चूत से लंड बाहर निकाल दो।


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