प्रतिभा के साथ सेक्स सम्बन्ध

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Antarvasna, hindi sex kahani:

Praitbha ke sath sex sambandh सुबह के 7:00 बज रहे थे मैं हर रोज की तरह सुबह अपने कॉलोनी की दुकान में गया और वहां से दूध लेकर मैं घर वापस लौटा। जब मैं दूध लेकर घर वापस लौट रहा था तो मुझे सत्यजीत मिले वह मुझे कहने लगे कि गौतम जी क्या आप कॉलोनी की मीटिंग में आ रहे हैं। मैंने सत्यजीत से कहा कि नहीं आज तो मैं नहीं आ पाऊंगा क्योंकि मुझे अपनी दीदी के घर जाना है वह मुझे कहने लगे कि ठीक है। मैंने उन्हें कहा हम लोग यहां से फ्लैट बेचकर मुंबई में शिफ्ट हो रहे हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि क्या आप मुंबई में ही जॉब करने वाले हैं तो मैंने उन्हें कहा कि हां मेरी जॉब मुंबई में लग चुकी है इसलिए हम लोग मुंबई में ही शिफ्ट होना चाह रहे हैं। उनसे मेरी बात ज्यादा देर तक नहीं हुई फिर मैं वापस लौट आया था। जब मैं घर वापस लौटा तो मां नाश्ता बनाने लगी। मैंने भी कुछ देर अखबार पढ़ा और उसके बाद मैंने नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद मैंने मां से कहा कि मां आप भी तैयार हो जाइए। मां मुझे कहने लगे कि हां बेटा मैं तैयार हो जाती हूं।

मां तैयार हो चुकी थी और पापा भी तैयार हो चुके थे और फिर हम लोग दीदी के घर पर चले गए। दीदी से मिले हुए एक लंबा अरसा हो गया था और जब हम लोग दीदी से मिले तो हमें काफी अच्छा लगा। उस दिन हम लोगों ने दीदी के घर पर ही डिनर किया जीजा जी भी घर पर ही थे उस दिन जीजा जी के ऑफिस की भी छुट्टी थी। जीजा जी के माता पिता कुछ समय के लिए नागपुर गए हुए थे। हम लोग रात के वक्त घर वापस लौट आए थे। थोड़े ही दिनों बाद हम लोग मुंबई शिफ्ट हो गए थे और उसके बाद हम लोगों ने अपना फ्लैट बेच दिया था। मैं मुंबई में नौकरी करने लगा था मेरे लिए अब सब कुछ नया था लेकिन ऑफिस में मेरी दोस्ती जब महेश से हुई तो महेश से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा। महेश के साथ मेरी काफी गहरी दोस्ती हो गई थी और मैं जब भी महेश के साथ होता तो मुझे अच्छा लगता। महेश के परिवार से मिलना भी मुझे काफी अच्छा लगता है और वह भी मेरे घर पर अक्सर आ जाया करता था। महेश जब भी घर पर आता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है कि महेश घर पर आया।

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जब एक दिन महेश घर पर आया तो वह मुझे कहने लगा कि मैं कुछ दिनों के लिए पुणे जा रहा हूं। मैंने महेश को कहा कि क्या तुम्हारा वहां कोई जरूरी काम है तो उसने मुझे कहा कि उसे वहां अपने कजन भाई से मिलना है। मैंने महेश को कहा कि क्या सब कुछ ठीक है तो वह मुझे कहने लगा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मुझे उनसे मिलने के लिए पुणे जाना है। मैंने महेश को कहा कि तुम अगर पुणे जा रहे हो तो तुम मेरी दीदी से भी मिल लेना महेश कहने लगा कि ठीक है मैं तुम्हारी दीदी से भी मिल लूंगा। मुझे दीदी को कुछ जरूरी सामान देना था इसलिए मैंने महेश को जब यह कहा तो महेश ने कहा कि मैं दीदी को मिल लूंगा। जब महेश पुणे गया तो वह दीदी से मिला। महेश कुछ दिनों तक पुणे में रहा और फिर वह वापस मुंबई लौट आया था। वह वापस मुंबई लौट आया था और 1 दिन महेश ने मुझे कहा कि आज तुम शाम के वक्त मेरे घर पर आना।

मैंने महेश को कहा कि क्या आज तुम्हारे घर पर कोई प्रोग्राम है तो महेश मुझे कहने लगा कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है। उस दिन शाम के वक्त जब मैं महेश के घर गया तो महेश ने मुझे इस बारे में बताया नहीं था कि उसका बर्थडे है मुझे भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी लेकिन मुझे यह बहुत ही अच्छा लगा कि महेश मुझे अपना सबसे करीबी दोस्त मानता है। उस दिन हम लोगों ने महेश का बर्थडे उसके घर पर ही सेलिब्रेट किया। मैं देर रात को घर पहुंचा था। जब मैं घर पहुंचा तो पापा और मम्मी उठे हुए थे उन्होंने कहा कि बेटा तुम्हारा नंबर नहीं लग रहा था। मैंने उन्हें बताया कि मैं अपने दोस्त महेश के घर गया हुआ था और मेरा फोन स्विच ऑफ हो गया था इस वजह से मेरा नंबर नहीं लग रहा होगा। मैंने पापा और मम्मी से कहा कि आप लोगों को सो जाना चाहिए था वह कहने लगे कि नहीं हमें नींद नहीं आ रही थी।

मैं घर आ चुका था उसके बाद पापा मम्मी भी सो चुके थे और मैं अपने कमरे में उठा हुआ था क्योकि मुझे नींद नहीं आ रही थी मेरी आंखों से नींद गायब थी। अगले दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी थी ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से मैंने सोचा कि आज थोड़ा बहुत घर का काम कर लिया जाए। उस दिन मैंने मां की मदद की और मैं उस दिन मां के साथ राशन लेने के लिए भी गया हुआ था। मैं मां के साथ राशन लेने के लिए गया था तो मुझे वहां पर एक लड़की दिखी जो मुझे काफी पसंद आई लेकिन मैं उसके बारे में कुछ जानता नहीं था। मुझे यह बात मालूम नहीं थी कि वह हमारे पड़ोस में ही रहती है।

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मुझे जब भी वह दिखाई देती तो मुझे उससे बात करने की इच्छा होती लेकिन मैं उससे बात नहीं कर पाया था। मैं उसके बारे में जानना चाहता था लेकिन अभी तक मुझे उसके बारे में कुछ भी पता नहीं था मैंने सोचा कि क्यों ना मैं उस लड़की से बात करूं। एक दिन मैंने जब प्रतिभा से बात की तो मुझे उससे बात करके अच्छा लगा। यह पहली बार ही था जब हम लोगों की बात हुई प्रतिभा और मुझे एक दूसरे से बातें कर के काफी अच्छा लगा। उस दिन के बाद हम लोगों की बातें होने लगी थी। एक दिन मैं अपने ऑफिस से लौट रहा था तो उस दिन मैंने देखा कि प्रतिभा बस स्टॉप पर खड़ी बस का इंतजार कर रही थी। मैंने अपनी मोटरसाइकिल रोकते हुए प्रतिभा से कहा कि मैं भी घर जा रहा हूं अगर तुम्हें कोई एतराज नहीं है तो तुम मेरे साथ चल सकती हो। प्रतिभा को भी कोई परेशानी नहीं थी और वह मेरे साथ उस दिन घर आ गई।

हम दोनों एक दूसरे के और भी ज्यादा करीब आते जा रहे थे और मैं चाहता था कि मैं प्रतिभा से अपनी नजदीकियां बढ़ाऊँ। हम दोनों एक दूसरे से हर रोज मिलने लगे थे जिस दिन भी हम लोगों की मुलाकात नहीं होती उस दिन मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता लेकिन अब मैं और प्रतिभा एक दूसरे को हर रोज मिलते। हम दोनों की मुलाकात एक दूसरे से होती तो मुझे काफी अच्छा लगता और अब प्रतिभा को भी अच्छा लगने लगा था। हम दोनों एक दूसरे से फोन पर भी बातें करने लगे थे और जब भी हम दोनों साथ में होते तो हम दोनों साथ में अच्छा टाइम स्पेंड करने के बारे में सोचते। मैंने भी अब प्रतिभा को डेट करने का फैसला कर लिया था और मैं उसे डेट करने लगा था। मुझे काफी खुशी थी कि मैं प्रतिभा को डेट करने लगा हूं और मेरे और प्रतिभा की जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चलने लगा था। प्रतिभा मुझे काफी अच्छे से समझती है और मुझे भी उसका साथ बहुत ही अच्छा लगता है। जब हम दोनों एक दूसरे के साथ में समय बिताते हैं तो हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता है और हम दोनों एक दूसरे से काफी ज्यादा प्यार करते हैं।

प्रतिभा और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं। हम दोनों की फोन पर भी कई बार अश्लील बातें हो जाती लेकिन अभी तक हम दोनों के बीच में कभी भी सेक्स संबंध नहीं बन पाया था परंतु एक दिन मैंने जब प्रतिभा से इस बारे में बात की तो वह भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए तडपने लगी थी। हम दोनों चाहते थे हम दोनों सेक्स करें। मैंने जब प्रतिभा को अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया तो प्रतिभा भी घर पर आ गई। हम दोनों एक दूसरे के बाहों में थे जब मैं उसके होठों को चूम रहा था तो वह गर्म होती जा रही थी और मेरी तड़प को और भी ज्यादा बढ़ा रही थी। मैंने प्रतिभा से कहा मैं तुम्हारी चूत में लंड घुसाना चाहता हूं। प्रतिभा भी अब तड़पने लगी थी और जब मैंने अपने लंड को उसके सामने किया तो वह कहने लगी तुम्हारा लंड कितना मोटा है। मैंने प्रतिभा से कहा तुम इसे अपने हाथों में ले लो और प्रतिभा ने उसे अपने हाथों में ले लिया। वह अब मेरे मोटे लंड को हिला रही थी। वह जिस तरीके से मेरे लंड को हिला रही थी उससे मुझे मजा आने लगा था और मैं काफी खुश हो गया था।

जब प्रतिभा ने मेरे लंड का रसपान करना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और वह भी तड़पने लगी। हम दोनों पूरी तरीके से तड़पने लगे थे। मेरी तड़प अब इतनी बढ़ चुकी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था लेकिन जब मैंने प्रतिभा से कहा मैं तुम्हारी चूत में लंड घुसाना चाहता हूं तो उसने अपने कपड़े उतार दिए। वह मेरे सामने नंगी थी। प्रतिभा का नंगा बदन देख मैंने उसके बदन को ऊपर से लेकर नीचे तक महसूस किया। उसकी चूत से पानी निकलने लगा था वह मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी। मैंने प्रतिभा की चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। प्रतिभा की चूत के अंदर तक मेरा लंड जा चुका था अब उसकी सिसकारियां बढने लगी थी। प्रतिभा की सिसकारियां इतनी बढ़ने लगी थी मुझे मजा आने लगा था और मैं काफी खुश था।

मैं प्रतिभा के साथ बड़े ही अच्छे तरीके से सेक्स संबंध बना रहा था और उसे मैं बड़ी ही तेजी से धक्के दिए जा रहा था। मैंने प्रतिभा को तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए थे जब मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो वह मुझे कहती तुम और तेजी से मुझे धक्के देते रहो। मैंने प्रतिभा को बहुत ही तेजी से धक्के दिए। जब प्रतिभा ने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया तो वह मुझे कहने लगी अब मैं झड़ चुकी हूं। मैंने प्रतिभा से कहा मैं तुम्हारी चूत में अपने वीर्य को गिरा रहा हूं। मैंने प्रतिभा की चूत की खुजली को शांत कर दिया था। मेरे अंदर की गर्मी भी अब शांत हो चुकी थी जिस तरीके से हम दोनों ने सेक्स किया था। उसके बाद हम दोनों ने दोबारा से सेक्स किया और एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया था।


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