जब कविता की चूत की गर्मी बढ़ गयी

Spread the love

[ A+ ] /[ A- ]

Font Size » Large | Small


Antarvasna, hindi sex kahani:

Jab kavita ki chut ki garmi badh gayi भैया की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद भैया लंदन चले गए थे और वह वहीं नौकरी करने लगे थे। मैं कॉलेज के आखिरी वर्ष में था और अब मेरी पढ़ाई भी पूरी होने वाली थी, मैं एमबीए कर रहा हूं। जब हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट हुआ तो मेरा सिलेक्शन भी उस कैंपस प्लेसमेंट में हो गया मेरे साथ  कविता का भी सलेक्शन हुआ और हम दोनों अब एक ही कंपनी में जॉब करने लगे। कविता और मेरी पहले से ही अच्छी बनती है इसलिए मुझे इस बात की बड़ी खुशी थी कि कविता भी उसी कंपनी में जॉब करती है जिसमें मैं जॉब करता हूं। हम दोनों की कॉलेज के पहले दिन से ही काफी अच्छी दोस्ती है और मैं कविता के साथ काफी बातें किया करता हूं।

एक दिन हम दोनों शाम के वक्त अपने ऑफिस से घर लौट रहे थे। कविता अक्सर मेरे साथ ही ऑफिस से घर लौटा करती थी तो कविता ने मुझे उस दिन पूछा कि तुम्हारे भैया तो लंदन में रहते हैं। मैंने कविता से कहा हां भैया की जॉब लंदन में लग चुकी है और वह वहीं रहते हैं। कविता ने मुझे कहा कि तुम्हारे भैया से मैं एक बार पहले मिली थी वह बहुत ही अच्छे हैं, मैंने कविता से कहा कि हां वह बहुत ही अच्छे हैं। कविता ने उस दिन मुझे कहा कि वह अपनी मौसी के घर जा रही है। मैंने कविता से कहा कि लेकिन तुम अपनी मौसी के घर कब जा रही हो और क्या तुम्हारी मौसी दिल्ली में ही रहती है तो कविता कहने लगी कि नहीं मेरी मौसी लखनऊ में रहती हैं और मैं कुछ दिनों के लिए उनके घर जा रही हूं।

loading...

मैंने कविता से कहा लेकिन तुम लखनऊ कब जा रही हो तो कविता ने मुझे कहा कि मैं बस दो-तीन दिन मे लखनऊ चली जाऊंगी। कविता और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैंने कविता से कहा कि कविता क्या आज मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूं तो कविता ने कहा कि हां तुम मुझे मेरे घर छोड़ दो। उस दिन मैंने कविता को उसके घर छोड़ दिया कविता और मैं अगले दिन भी सुबह ऑफिस में मिले। कविता ने अगले दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली थी कविता कुछ दिनों के लिए लखनऊ जाने वाली थी। जब कविता लखनऊ चली गई तो मेरी उससे करीब एक हफ्ते तक बात नहीं हो पाई लेकिन जब कविता लखनऊ से वापस लौटी तो कविता ने मुझे प्रेम के बारे में बताया। मैंने कविता से कहा की प्रेम तुम्हारा अच्छा दोस्त है तो कविता ने मुझे कहा कि नहीं हम दोनों की मुलाकात लखनऊ में हुई और हम दोनों एक दूसरे को बहुत पसंद करने लगे।

कविता का इससे पहले किसी के साथ कोई रिलेशन नहीं था लेकिन कविता ने मुझे जब प्रेम के बारे में बताया तो मैंने कविता से कहा कि क्या प्रेम लखनऊ में ही रहता है। कविता मुझे कहने लगी कि हां वह लखनऊ में ही रहता है और वह लखनऊ में ही बिजनेस करता है। मैंने कविता से कहा यह तो बहुत अच्छा है। कविता से बातें करना मुझे बहुत ही अच्छा लगता है और उस दिन भी हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि प्रेम कविता को धोखा दे रहा है। ना तो मैं कभी प्रेम से मिला था और ना ही मैं उसे जानता था कविता और प्रेम एक दूसरे से बातें किया करते। कविता मुझसे अक्सर प्रेम के बारे में कहती लेकिन कविता को प्रेम की असलियत मालूम नहीं थी। वह प्रेम से बहुत प्यार करने लगी थी लेकिन जब कविता को प्रेम की असलियत पता चली तो कविता पूरी तरीके से टूट गई थी।

मैंने कविता को समझाया और कहा कि देखो कविता ऐसी गलती हो जाती हैं। कविता ने प्रेम को समझने में बहुत बड़ी गलती की और कविता को जब उसकी असलियत पता चली कि वह पहले से ही शादीशुदा है तो कविता पूरी तरीके से टूट गई थी। मैंने कविता को उस वक्त काफी संभाला और अब कहीं ना कहीं कविता का झुकाव मेरी ओर होने लगा था लेकिन मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि क्या कविता मुझसे प्यार करती है। एक दिन कविता ने मुझे प्रपोज किया जब उस दिन कविता ने मुझे प्रपोज किया तो मैं कुछ समझ नहीं पाया। कविता मुझे अच्छी जरूरत लगती थी और वह मेरी अच्छी दोस्त भी है लेकिन मैंने कभी भी उसके बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचा था। उस दिन जब कविता ने मुझसे अपने दिल की बात कही तो मैं भी कविता को मना ना कर सका और अब हम दोनों का प्रेम संबंध चलने लगा। हम दोनों एक दूसरे से बहुत ही ज्यादा प्यार करते हैं और जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा है उससे हम दोनों बहुत ही खुश हैं। कविता मेरा बहुत ध्यान रखती है और मुझे भी काफी अच्छा लगता है जब भी हम दोनों साथ में होते हैं।

loading...

हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने की कोशिश करते हैं और मैं ज्यादातर टाइम स्पेंट कविता के साथ ही किया करता हूं। हम दोनों ऑफिस में भी साथ होते हैं और जब ऑफिस के बाद हम दोनों को समय मिलता है तो हम दोनों साथ में ही कुछ देर बैठ जाया करते हैं। कविता को मैं अक्सर उसके घर छोड़ दिया करता हूं। मुझे जब भी कोई परेशानी होती तो मैं कविता से शेयर कर लिया करता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। हम दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करने लगे और जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा है उससे हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश हैं। मैं इस बात से बहुत खुश था कि कविता और मैं एक दूसरे के साथ प्रेम संबंध में है और कविता अब प्रेम के बारे में भूल कर आगे बढ़ चुकी है। एक शाम कविता और मैं ऑफिस से लौट रहे थे तो कविता ने मुझे कहा कि चलो आज हम लोग कहीं चलते हैं। मैंने कविता से कहा क्या तुम्हें घर नहीं जाना है तो कविता ने मुझे कहा कि मुझे घर तो जाना है लेकिन मैं चाहती हूं कि आज तुम्हारे साथ समय बिताऊँ।

उस दिन हम दोनों साथ में डिनर करने के लिए गए और उस दिन साथ में हम लोगों ने काफी अच्छा समय बिताया। उसके बाद मैंने कविता को उसके घर छोड़ दिया था। हालांकि हम दोनों को काफी देर हो चुकी थी और जब कविता घर पहुंची तो हम दोनों की फोन पर बातें हुई। मेरी बात कविता से फोन पर काफी देर तक हुई उसके बाद मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई और मैं सो चुका था। कविता भी बहुत ज्यादा खुश है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ प्रेम संबंध में है और मैं कविता का बहुत ध्यान रखता हूं। कविता को इस बात की बड़ी खुशी है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में बहुत ही ज्यादा खुश हैं। कविता और मेरा प्रेम संबंध अच्छे से चल रहा है। एक दिन कविता और मैं ऑफिस से घर वापस लौट रहे थे। मैंने कविता से कहा मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं लेकिन उसने रास्ते में बहुत ज्यादा बारिश हो रही थी और हम दोनों भीग चुके थे। रास्ते में ही मेरा दोस्त का घर है और हम दोनों वहां पर चले गए।

कविता और मैं रूम में बैठे हुए थे मैंने कविता को तौलिया दिया वह अपने बदन को पोछ रही थी। मैं कविता को देखे जा रहा था कविता का गदराया हुआ बदन देख मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। मैं बहुत ज्यादा गर्म हो चुका था। मैंने कविता के होंठों को चूमना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की गर्मी को अब इतना ना बढ़ाओ। मैंने कविता से कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है और मैं कविता के होंठो को अच्छी तरीके से चूम रहा था। जिस से कविता की गर्मी बढ़ती चली गई। मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने उसे अपने हाथों में लेते हुए सहलाना शुरू किया। कविता मेरे लंड को सहला रही थी उससे मुझे मजा आ रहा था।

कविता भी गर्म होती जा रही थी लेकिन जब कविता की चूत से पानी निकलने लगा तो मैं समझ चुका था कविता की गर्मी बढ़ चुकी है। लह मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही थी। कविता की गर्मी हो इतनी बढ़ चुकी थी कि वह बिल्कुल भी रह ना सकी। मैं भी कविता के स्तनों का रसपान किया और फिर कविता की पैंटी को उतारकर जब मैंने उसकी चूत को चाटा तो वह गर्म होती चली गई। वह बहुत ही ज्यादा गर्म होती चली गई। मैंने कविता की चूत के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया तो वह चिल्लाने लगी। मेरा मोटा लंड बड़ी ही आसानी से कविता की चूत में घुस चुका था जिसके बाद मैंने कविता को बड़ी तेजी से चोदना शुरु किया। कविता को मजा आने लगा था। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। कविता की चूत के अंदर बाहर मेरा लंड होता जा रहा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाया। मैं समझ चुका था मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकलने वाला है और जैसे ही मेरा वीर्य बाहर की तरफ गिरा तो मैंने कविता से कहा मैंने अपने वीर्य को तुम्हारी चूत मे गिरा दिया है। कविता के चेहरे पर खुशी थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था कि कविता और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स के मजे ले पाए हैं।


Comments are closed.


Spread the love