सुनीता ने अपने चूतड़ मेरे आगे कर दिए

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Antarvasna, hindi sex kahani:

Sunita ne apne chutad mere aage kar diye सुनीता मुझसे कहने लगी आज हम लोग राकेश और पायल के घर चलते हैं। मैंने सुनीता से कहा ठीक है आज वैसे भी हम लोग सुबह से घर पर ही हैं। उस दिन हम लोग राकेश और पायल को मिलने के लिए चले गए। राकेश मेरा अच्छा दोस्त है और सुनीता की पायल से काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। जब उस दिन हम लोग उन लोगों को मिलने के लिए गए तो हमें भी काफी अच्छा लगा काफी लंबे समय के बाद हम लोग पायल से मिल रहे थे। राकेश ने मुझे बताया पायल और वह कुछ दिनों के लिए घूमने का प्रोग्राम बना रहे हैं। मैंने राकेश को कहा लेकिन तुम लोग कहां घूमने के लिए जाने वाले हो? वह लोग कहने लगे हम लोग सोच रहे हैं हम लोग कुछ दिनों के लिए नैनीताल घूम आते हैं। मैंने राकेश को कहा यह बहुत ही अच्छा और हम लोग नैनीताल घूमने के लिए जाना चाहते थे। मैंने राकेश को कहा हम लोग तुम लोगों भी तुम्हारे साथ घुमने के लिए आना चाहते है।

राकेश कहने लगा यह बहुत ही अच्छा रहेगा। उस दिन सुनीता बहुत ज्यादा खुशी थी सुनीता मुझे कहने लगी काफी दिनों से वैसे भी हम लोग कहीं घूमने के लिए साथ में नहीं गए थे इस बहाने कम से कम हम लोग कुछ दिनों के लिए घूम तो आएंगे। मैंने सुनीता को कहा हां मैं भी यही सोच रहा था तभी तो मैंने राकेश को कहा हम लोग भी तुम्हारे साथ चलते हैं।  हम लोगों नैनीताल घूमने के लिए जाने वाले थे। मैंने और सुनीता ने अपना सामान पैक किया हम लोगों ने पापा मम्मी को बता दिया था हम लोगों नैनीताल जा रहे हैं। हम लोग अब कुछ दिनों के लिए नैनीताल चले गए थे वहां पर हम सब लोगों ने काफी अच्छा समय बिताया और वहां पर खूब इंजॉय भी किया। नैनीताल का टूर बहुत ही अच्छा रहा वहां पर हम लोगों ने 3 दिन बिताए। हमें पता ही नहीं चला कि कब 3 दिन बीत गए। अब हम लोग वापस लौट आए थे। जब मैं वापस लौटा तो मुझे अपने काम के सिलसिले में जयपुर जाना था। मैं कुछ दिनों के लिए जयपुर चला गया था।

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सुनीता का मुझे फोन आया उस दिन मैं जयपुर से वापस लौट रहा था। जब मुझे सुनीता का फोन आया था वह मुझे कहने लगी आप कब तक पहुंच जाएंगे। मैंने सुनीता से कहा मैं 3 घंटे में घर पहुंच जाऊंगा। सुनीता कहने लगी यह ठीक है और उस दिन जो मैं घर पहुंचा तो उस समय रात के 12:00 बज रहे थे। मुझे घर पहुंचने में देरी हो गई थी सुनीता ने मुझे कहा आपका सफर कैसा रहा? मैंने सुनीता से कहा मेरा सफर तो ठीक ही रहा बस ट्रेन लेट हो गई थी जिस वजह से मुझे घर पहुंचने में देर हो गई। सुनीता ने मुझे कहा आप खाना खा लीजिए। मैंने सुनीता को कहा मेरा मन नहीं है लेकिन सुनीता के कहने पर मैंने खाना खा लिया था। अगले दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी थी मैंने सुनीता से कहा  आज हम लोग दीदी को मिलाते हैं। सुनीता कहने लगी ठीक है आज हम लोग दीदी से मिलने के लिए चलते हैं और हम लोग उस दिन दीदी को मिलने के लिए चले गए। अगले दिन जब हम लोग दीदी को मिलने के लिए गए तो हमें बहुत ही अच्छा लगा।

दीदी से मिलकर हम लोग बहुत ज्यादा खुश थे काफी दिनों के बाद हम लोग दीदी को मिलने के लिए गए थे और दीदी से मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा था। मैंने दीदी से कहा कि आप जीजाजी को फोन कर लीजिए। दीदी ने कहा ठीक है मैं उन्हे फोन कर लेती हूं। दीदी ने जब उन्हें फोन किया तो जीजाजी भी थोड़ी देर बाद वापस लौट आए थे। जब वह वापस लौटे तो उस दिन हम लोगो ने दीदी और जीजाजी के साथ काफी अच्छा समय बिताया। वहां पर हम लोगों ने उस दिन लंच भी किया उसके बाद हम लोग वहां से वापस घर लौट आए थे। मेरे और सुनीता की शादी शुदा जिंदगी बहुत ही अच्छे से चल रही है। हम दोनों एक दूसरे को पहली बार अपने दोस्त की पार्टी में मिले थे क्योंकि सुनीता भी आकाश को जानती थी और मैं भी आकाश को जानता था आकाश ने ही हम दोनों की मुलाकात करवाई थी।

हम दोनों को एक दूसरे से मिलकर अच्छा लगा। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से मिलने लगे थे और करीब एक साल तक हम दोनों ने एक दूसरे को डेट किया। एक-दूसरे को डेट करने के बाद मुझे लगने लगा मुझे सुनीता से शादी करनी चाहिए। मैंने सुनीता को अपने दिल की बात कह दी थी सुनीता भी मुझसे शादी करने के लिए तैयार थी। सुनीता ने अपने पापा मम्मी से हम दोनों के रिश्ते की बात की सुनीता ने अपने पापा से बात की थी उसके पापा हम दोनों की शादी के लिए तैयार हो चुके थे। हम दोनों की शादी हो जाने के बाद हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश है। जिस तरीके से सुनीता और मैं एक दूसरे के साथ होते हैं उस से हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है और सुनीता ने हमेशा ही मेरा साथ दिया है। सुनीता के साथ मेरी शादीशुदा जिंदगी बहुत ही अच्छे से चल रही हैं। मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा है सुनीता और मैं जब भी एक दूसरे के साथ होते हैं। हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा लगता है।

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हम दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार भी करते हैं मुझे सुनीता के साथ हमेशा ही अच्छा लगता है और सुनीता को भी बहुत ही अच्छा लगता है। मेरे और सुनीता के बीच सेक्स लाइफ भी बहुत अच्छी है। हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स की जमकर मजे लिया करते हैं। जब भी मुझे सुनीता के साथ सेक्स करना होता है तो वह भी हमेशा मेरे साथ सेक्स करने के लिए तड़प रही होती है। अभी कुछ दिन पहले ही मैं और सुनीता साथ में थे। मैं ऑफिस से घर लौटा था मैं बहुत ज्यादा थकावट महसूस कर रहा था। मैंने सुनीता से कहा मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूं तो सुनीता ने कहा हां क्यों नहीं। सुनीता हमेशा मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार रहती है। सुनीता और मैं एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे। मैंने सुनीता के सामने जब अपने लंड को किया तो सुनीता ने उसे अपने हाथों में ले लिया। वह अपने हाथों से लंड को हिलाती तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था।

हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा दिया था। मैंने सुनीता से कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं। सुनीता ने भी मेरे लंड को अपने मुंह में समा लिया था और वह उसे चूसने लगी थी। वह जिस तरीके से मेरे मोटे लंड को चूसने लगी उस से मुझे मजा आने लगा था और सुनीता को भी मजा आ रहा था। वह जिस तरीके से मेरा साथ दे रही थी हम दोनों की गर्मी भी बढ़ती जा रही थी। अब मुझसे बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने सुनीता से कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना चाहता हूं। सुनीता भी इस बात के लिए तैयार थी। सुनीता ने अपने कपड़ों को खोला। जब उसने अपने कपडो को खोला तो मैंने सुनीता के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था। मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने सुनीता से कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है।

सुनीता की चूत पर मैंने अपने लंड को लगाया उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था। वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ रही है। अब हम दोनों तडपने लगे थे मैं भी तडपने लगा था। हम दोनो जिस तरीके से एक दूसरे के बदन को महसूस कर रहे थे उससे हम दोनो बहुत ही खुश थे। हम दोनों की गर्मी बढ़ती जा रही थी। मैंने सुनीता से कहा मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। वह मुझे कहने लगी तुम मेरी चूत में अपने लंड को घुसा दो। सुनीता ने अपने पैरों को चौड़ा किया मैंने सुनीता की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया। उसकी योनि के अंदर मेरा मोटा लंड चला गया था। सुनीता की चूत में मेरा लंड जाते ही वह मचलाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। सुनीता को मजा आ रहा था और मुझे भी कहीं ना कहीं मजा आने लगा था। मैंने देखो वह मचल रही थी और उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थी। सुनीता की गरम सिसकारियां बढ रही थी और मेरी गर्मी भी बढने लगी थी। मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मैंने सुनीता को कहा मुझसे रहा नहीं जा रहा है। मेरा वीर्य जल्दी गिर चुका था।

सुनीता ने अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ किया। मैंने सुनीता से कहा मैं तुम्हारी चूत में अपने लंड को डाल रहा हूं। सुनीता की चूत में मैंने अपने लंड को डाल दिया था। मेरा लंड सुनीता की चूत में बड़ी आसानी से चला गया था जिसके बाद मेरा लंड सुनीता की चूत में जाते ही वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। अब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढाए जा रहे थे। जिस तरीके से मैं और सुनीता एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे हम दोनों को मजा आ रहा था। मेरी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। सुनीता मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैंने भी सुनीता से कहा मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लगा है। सुनीता मुझसे चूतडो को मिलाए जा रही थी। जब मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था मैंने सुनीता की चूत में अपने माल को गिराने का फैसला किया और सुनीता की चूत में मेरा माल गिरते ही वह बहुत खुश हो गई थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ लेट हुए थे।


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