कभी हमारा भी ध्यान दीजिये मैडम साहिबा

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Kamukta, hindi sex stories, antarvasna:

Kabhi humara bhi dhyan dijiye madam sahiba मैं बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं और जब मैं अहमदाबाद आया तो अहमदाबाद में मैंने अपना कारोबार शुरू किया मैंने एक छोटी सी दुकान से अपना कारोबार शुरू किया और उसके बाद देखते ही देखते मैं एक अच्छा कारोबारी बन गया। मेरा व्यापार भी अच्छा चलने लगा और मैं अपने काम से भी खुश था मैंने अहमदाबाद में ही शादी कर ली और मैं अपने परिवार के साथ अब अहमदाबाद में रहने लगा। मुझे हमदाबाद में रहते हुए तकरीबन 15 वर्ष हो चुके हैं इन 15 वर्षों में मेरे जीवन में बहुत से बदला आये है मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव तो यह हुआ कि मैं अपने व्यापार में लगातार तरक्की करता रहा। मेरे अहमदाबाद में काफी अच्छे दोस्त हैं जिनसे मैं जब भी मिलता हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है उन लोगों ने मेरी काफी मदद की और हमेशा ही वह लोग मेरी मदद के लिए आगे रहते हैं। मैंने अपने दोस्त से एक दिन कहा कि क्या तुम मेरे साथ मेरे गांव चलोगे, मैं सोच रहा था कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने गांव चले जाऊं इसलिए मैंने अपने दोस्त को कहा कि तुम मेरे साथ गांव चलो।

वह मेरे साथ मेरे गांव आने के लिए तैयार हो गया मैं चाहता था कि मैं अकेले अपने गांव जाऊं क्योंकि मेरे बच्चों के स्कूल की पढ़ाई चल रही थी और उसी दौरान हमारे गांव में हमारे एक दूर के रिश्तेदार हैं उनके घर शादी थी और मेरा वहां जाना जरूरी था। मेरा दोस्त मुकेश मेरे साथ आने के लिए तैयार हो गया और हम दोनों मेरे गांव शादी में चले गए जब हम लोग शादी में गए तो वह मेरे गांव आकर खुश हो गया और कहने लगा कि यहां पर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ समय के लिए ही सही लेकिन अच्छा लग रहा था और मुझे भी इस बात की खुशी थी कि कम से कम मैं अपने गांव तो आ पाया। काफी वर्षों बाद मैं अपने गांव आया था इसलिए कुछ धुंधली तस्वीरें आज भी मेरे जहन में ताजा थी और मैं सोच रहा था कि काश मैं पहले गांव आ जाता लेकिन मैं गांव आ ना सका। हम लोग कुछ दिन गांव में रुके और शादी में हम लोगों ने खूब जमकर मजे किए उसके बाद मैं और मुकेश वापस अहमदाबाद लौट आए। मैं जब अहमदाबाद लौटा तो मेरी पत्नी कहने लगी कि कल बच्चों के स्कूल जाना पड़ेगा तो मैंने उसे कहा लेकिन बच्चों के स्कूल में क्या कोई जरूरी काम है।

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वह कहने लगी कि कल बच्चों के स्कूल में एनुअल फंक्शन है तो हम दोनों को ही वहां जाना जरूरी होगा। मैंने अपनी पत्नी से कहा ठीक है कल हम लोग वहां चलेंगे और हम दोनों ही बच्चों के स्कूल में एनुअल फंक्शन में चले गए। जब हम लोग वहां पर गए तो हमारे पड़ोस में रहने वाले माधव भाई हमें दिखाई दिए वह हमारे पास आये और कहने लगे कि रोहित भाई आप भी यहां पर आए हुए हैं। मैंने उन्हें कहा हां मैं दरअसल कल ही गांव से लौटा था तो मेरी पत्नी ने मुझे कहा कि बच्चों के स्कूल में एनुअल फंक्शन है और हमें वहां जाना जरूरी है तो मुझे भी लगा कि बच्चों के लिए थोड़ा समय निकाल लेना चाहिए इसलिए मैं और मेरी पत्नी यहां आ गए। वह कहने लगे आप लोगों ने बहुत अच्छा किया जो आप यहां आए मैं उनसे बात कर रहा था तभी मेरा बेटा अक्षत हमारे पास दौड़ते हुए आया अक्षत कहने लगा कि पापा थोड़ी देर बाद मेरा डांस देखिएगा। मैंने उससे कहा अच्छा बेटा तुम डांस कब से करने लगे तो वह कहने लगा कि पापा हमारे स्कूल की डांस टीचर ने हमें डांस सिखाया था और उन्होंने ही मुझे कहा था कि तुम इस बार डांस करोगे। हालांकि अक्षत उम्र में बहुत छोटा है लेकिन उसके बात करने के तरीके से मुझे ऐसा लगता है कि जैसे वह अब बड़ा हो चुका है और समझदार भी होने लगा है। थोड़ी देर बाद अक्षत का डांस देखकर मुझे भी अच्छा लगा मैंने कभी सोचा नहीं था कि अक्षत इतने अच्छे से डांस करता होगा क्योंकि मुझे कभी घर में इतना समय ही नहीं मिल पाता था इस वजह से शायद मैं कभी अक्षत को समय दे ही नहीं पाया था। मैंने अपनी पत्नी से कहा अक्षत तो बहुत अच्छा डांस करता है तो वह कहने लगी कि हां उसकी डांस टीचर उसके ऊपर बहुत ध्यान देती है तो मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं अक्षत की डांस टीचर से मिलना चाहूंगा। वह कहने लगी कि ठीक है मैं आपको सरिता मैडम से मिलवा देती हूं लेकिन उस वक्त सरिता मैडम शायद बिजी थी इसलिए वह हमें मिल ना सकी, बादमे मेरी पत्नी ने मुझे सरिता मैडम से मिलवाया लेकिन उनसे उस दिन ज्यादा बात ना हो सकी वह कहने लगी कि सर मैं आपसे फुर्सत में बात करूंगी। मैंने सरिता मैडम को कहा ठीक है मैडम अब हम लोग अक्षत को अपने साथ घर ले आए थे उनके स्कूल का एनुअल फंक्शन बड़ा ही अच्छा रहा।

जब हम लोग घर पहुंचे तो मैंने अक्षत को कहा बेटा तुम बहुत अच्छा डांस करने लगे हो अक्षत कहने लगा कि पापा यह सब सरिता मैडम ने हीं मुझे सिखाया है। अक्षत 12 वर्ष का हो चुका है और वह पढ़ने में भी बहुत अच्छा है मैं हमेशा ही उसे बहुत सपोर्ट किया करता हूँ। अगले दिन मैं अपनी दुकान पर गया जब मैं अपनी दुकान पर पहुंचा तो दुकान पर काम करने वाले राजू काका ने बोला साहब पटेल भाई ने कुछ समय पहले यहां से सामान लिया था लेकिन जब मैंने उनसे पैसे के लिए कहा तो वह कहने लगे कि मैं रोहित भाई से बात कर लूंगा। मैंने राजू काका को बोला ठीक है मैं पटेल भाई से बात कर लेता हूं जब मैंने पटेल भाई से बात की तो वह कहने लगे कि मैं कुछ दिनों बाद आपके पैसे दे दूंगा लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह मेरे पैसे इतनी जल्दी देने वाले नहीं हैं। मैंने उन्हें दो-चार बार कहा लेकिन उन्होंने मुझे पैसे दिए ही नहीं मुझे अब इस बात का बुरा लग रहा था कि उन्होंने मेरे पैसे मुझे लौटाये नहीं है। मैंने जब उन्हें इस बारे में कहा तो वह कहने लगे कि रोहित भाई थोड़े समय बाद आपको पैसे दे देता हूं काफी कहने के बाद उन्होंने मुझे थोड़े बहुत पैसे दिए लेकिन अभी तक उन्होंने मुझे पूरे पैसे नहीं दिए थे।

मैं कभी भी अपनी दुकान पर उधार का काम नहीं किया करता था लेकिन पटेल भाई का हमारी दुकान पर अक्सर आना-जाना था इसलिए उन्हें राजू काका ने उधार दे दिया था और शायद यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। काफी कहने के बाद उन्होंने मेरे पैसे तो मुझे लौटा दिए थे लेकिन अब वह मेरी दुकान पर नहीं आया करते थे शायद उन्हें मेरी बात का बुरा लग गया था। रविवार के दिन मैं घर पर ही था तो मेरी पत्नी कहने लगी कि आज आप दुकान पर नहीं जा रहे हैं तो मैंने अपनी पत्नी से कहा नहीं आज मैं दुकान पर नहीं जा रहा हूं मैं सोच रहा हूं कि आज मैं घर पर ही आराम करूं। उस दिन मैं घर पर था तभी सरिता मैडम का फोन आया सरिता मैडम से मेरी पत्नी ने मेरी बात करवाई और उन्होंने मुझे स्कूल में मिलने के लिए बुलाया मैंने उन्हें कहा मैडम कल सुबह मैं आपसे स्कूल में आकर मिल लेता हूं। अगले दिन मैं सरिता मैडम से मिलने के लिए स्कूल में चला गया। मैं जॉब स्कूल में सरिता मैडम से मिला तो उनसे कुछ ही समय में मैंने एक अपनापन सा हासिल कर लिया वह मेरी कोई तारीफ करने लगी। मैंने उनसे अक्षत के बारे में पूछा तो वह कहने लगी अक्षत मेरा सबसे अच्छा स्टूडेंट है मैं उस पर पूरा ध्यान देती हूं मैंने सरिता मैडम को कहा आप थोड़ा बहुत ध्यान हमारा भी रख लिया कीजिए। उन्होंने मुझे अपने घर का पता दिया और कहा आप घर पर आ जाइए तो मैं आपका भी ध्यान दे दूंगी। मैं इस बात से खुश हो गया मैंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी कि मेरे हाथ इतना जबरदस्त माल लग जाएगा। मैं जब सरिता मैडम के घर पर गया था उनके पति घर पर नहीं थे वह अकेली थी मेरे लिए तो यह किसी सपने से कम नहीं था मैं जब उनके पास बैठा तो वह मेरी गोद में आई और उनकी गांड मेरे लंड से टकराने लगी थी मेरा लंड खड़ा हुआ तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और सरिता मैडम ने उसे अपने मुंह के अंदर समा लिया, उन्होने मेरे लंड को खड़ा कर दिया उन्हें बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी बड़ा आनंद आता।

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बहुत देर तक मैंने उनकी चूत को चाटा उनकी चूत से पानी बाहर निकाल दिया था वह बहुत ज्यादा उत्सुक हो गई थी और जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर सटाया तो वह मुझे कहने लगी कि अब आप अपने लंड को अंदर डाल दीजिए। मैंने भी धक्का मारते हुए अपने लंड को अंदर की तरफ घुसाया और जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत के अंदर तक गया तो वह चिल्ला उठी और अपनी मादक आवाज में मुझे कहने लगी आज तो मजा आ गया। मैंने उन्हें कहा मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे आपको बस धक्के ही मारता रहूं। उनके पैरों को मैंने अब अपने कंधों पर रख लिया था और उनकी चूत की दीवार से मेरा लंड टकरा रहा था मेरे अंडकोष उनकी चूत से टकराते तो मुझे भी अच्छा लगता और वह भी बहुत ज्यादा खुश नजर आ रही थी थोड़ी देर बाद ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने उन्हें कहा आपके बदन में तो एक अलग ही गर्मी है और मुझे बहुत अच्छा लगा जिस प्रकार से आज आपके साथ में सेक्स का मजा ले सका।

वह खड़ी हुई तो उनकी गांड की तरफ मेरी नजर गई और उनकी गांड मारने का मेरा मन होने लगा। मैंने उन्हें कहा आप मेरे लंड को चूसो तो उन्होंने भी मेरे लंड को चूसकर दोबारा से खड़ा कर दिया। मैंने भी उनकी गांड को पूरी तरीके से गिला कर लिया और अपने लंड को उनकी गांड मै डाला तो वह चिल्लाने लगी  और मेरा लंड उनकी गांड के अंदर प्रवेश हो चुका था मैं बड़ी तेजी से उन्हें धक्के मारने लगा मुझे उनकी गांड मारने में जो आनंद आ रहा था। उस से मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मैंने उनकी गांड के भी बडी देर तक मजे लिए और 10 मिनट बाद जब मेरा वीर्य बड़ी तेजी से बाहर की तरफ को निकला तो मैं खुश हो गया और सरिता मैडम का चेहरे खुशी बयां कर रहा था कि वह कितनी ज्यादा खुश है।


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